चेन्नई/मुंबई। Orient Green Power Company Limited (ओरिएंट ग्रीन पावर कंपनी लिमिटेड) ने 22 सितंबर 2026 की देर शाम अपने सोलर विस्तार लक्ष्य को पूरा कर लिया है। कंपनी की सहायक इकाई Delta Renewable Energy Private Limited (डेल्टा रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड) ने तमिलनाडु के थिरुवन्नामलई जिले के वंडावासी और चेटपेट तालुका में 17.60 मेगावाट एसी (24.64 मेगावाट डीसी) क्षमता का सोलर पावर प्लांट सफलतापूर्वक कमीशन कर दिया।

इससे कंपनी की कुल स्थापित सोलर क्षमता अब 24.6 मेगावाट एसी (34.44 मेगावाट डीसी) हो गई है। पहले दिसंबर 2025 में 7 मेगावाट एसी (9.8 मेगावाट डीसी) का प्लांट चालू हो चुका था। यह विस्तार 2024 के राइट्स इश्यू के तहत किए गए वादे को पूरा करता है।

परियोजना की मुख्य बातें

कंपनी ने 29 दिसंबर 2025 को Remon Solutions Private Limited (रेमोन सॉल्यूशंस) के साथ EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन) अनुबंध किया था। परियोजना का लक्ष्य एक या अधिक स्थानों पर कुल 17.60 मेगावाट एसी सोलर क्षमता विकसित करना था। 22 सितंबर की रात इस लक्ष्य को हासिल कर लिया गया। यह घटना SEBI (लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशन 2015 के रेगुलेशन 30 के तहत स्टॉक एक्सचेंजों को दी गई सूचना का हिस्सा है। BSE पर स्क्रिप कोड 533263 और NSE पर GREENPOWER है।

राइट्स इश्यू से जुड़ा वादा पूरा

2024 में कंपनी ने राइट्स इश्यू के जरिए फंड जुटाया था। उसमें सोलर क्षमता बढ़ाने का स्पष्ट उद्देश्य रखा गया था। पहले चरण में 7 मेगावाट क्षमता दिसंबर 2025 में चालू हुई। बाकी 17.6 मेगावाट अब पूरी हो गई। कंपनी के अनुसार, इससे 2024 राइट्स इश्यू के तहत सोलर विस्तार का लक्ष्य पूरा हो गया है।

Orient Green Power मुख्य रूप से पवन ऊर्जा पर आधारित कंपनी रही है। हाल के वर्षों में उसने सोलर में भी कदम बढ़ाया है। मार्च 2026 तक कुल स्थापित क्षमता लगभग 396 मेगावाट बताई गई थी, जिसमें ज्यादातर पवन ऊर्जा शामिल थी। सोलर जोड़ने से पोर्टफोलियो में विविधता आई है।

तमिलनाडु में सोलर विस्तार का महत्व

थिरुवन्नामलई जिला तमिलनाडु के उन क्षेत्रों में आता है जहां सोलर परियोजनाओं के लिए अनुकूल परिस्थितियां हैं। वंडावासी और चेटपेट तालुका में यह प्लांट स्थानीय स्तर पर नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाएगा। भारत सरकार और राज्य सरकार दोनों नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों पर जोर दे रही हैं। ऐसे छोटे-मझोले विस्तार कुल क्षमता में योगदान देते हैं।

कंपनी सचिव एवं कंप्लायंस ऑफिसर जी. श्रीनिवास रामानुजन ने स्टॉक एक्सचेंजों को पत्र लिखकर इस जानकारी को रिकॉर्ड पर लेने का अनुरोध किया है।

सोलर क्षमता बढ़ने से कंपनी की बिजली उत्पादन क्षमता मजबूत होगी। पवन और सोलर के मिश्रण से मौसमी उतार-चढ़ाव को कुछ हद तक संतुलित किया जा सकता है। निवेशक और बाजार भागीदार अब इस क्षमता से होने वाले राजस्व प्रभाव को ध्यान से देखेंगे।

यह खबर 23 सितंबर 2026 को सामने आई है। Orient Green Power की यह उपलब्धि भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में छोटी लेकिन ठोस प्रगति का उदाहरण है। कंपनी लगातार क्षमता बढ़ाने और परिचालन दक्षता सुधारने पर काम कर रही है।