नई दिल्ली। एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (NTPC Green Energy Limited) ने गुजरात के दाहोद में स्थित अपने 200 मेगावाट सोलर पीवी प्रोजेक्ट की तीसरी पार्ट क्षमता 68.22 मेगावाट को कमर्शियल ऑपरेशन में लाने की घोषणा की है। यह क्षमता 23 जुलाई 2026 से कमर्शियल ऑपरेशन के तहत आ गई है। गुजरात एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (GEDA) द्वारा 17 सितंबर 2026 को जारी सर्टिफिकेट के आधार पर यह घोषणा की गई।

दाहोद सोलर प्रोजेक्ट की पूरी तस्वीर

दाहोद सोलर प्रोजेक्ट एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी का महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। कुल 200 मेगावाट क्षमता वाले इस सोलर प्लांट में अब तक की तीसरी किस्त के रूप में 68.22 मेगावाट क्षमता सफलतापूर्वक कमर्शियल ऑपरेशन में आ गई है। इससे पहले भी इस प्रोजेक्ट की कुछ क्षमताएं पहले से ही ग्रिड से जुड़ी हुई थीं। अब कुल क्षमता का बड़ा हिस्सा व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुका है।

यह प्रोजेक्ट गुजरात में सोलर एनर्जी क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक और मजबूत कदम है। दाहोद जिले में स्थित यह प्लांट स्थानीय स्तर पर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाएगा और राज्य के बिजली ग्रिड को मजबूत करेगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह घोषणा?

  • नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य: भारत सरकार के नेट-जीरो और 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के लक्ष्य को पूरा करने में एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
  • गुजरात में सोलर बूम: गुजरात पहले से ही सोलर पावर में अग्रणी राज्य है। दाहोद प्रोजेक्ट इस ट्रेंड को और मजबूत करता है।
  • कमर्शियल ऑपरेशन का मतलब: अब यह क्षमता पूर्ण रूप से बिजली बेचने और राजस्व उत्पन्न करने योग्य हो गई है। इससे कंपनी की आय में वृद्धि होने की उम्मीद है।

एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी की आगे की योजना

एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी लगातार सोलर, विंड और हाइब्रिड प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है। कंपनी का फोकस बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा क्षमता जोड़ने पर है। दाहोद जैसे प्रोजेक्ट्स से न सिर्फ बिजली उत्पादन बढ़ेगा बल्कि स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

गुजरात एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी द्वारा जारी सर्टिफिकेट इस बात की पुष्टि करता है कि प्लांट की यह क्षमता सभी तकनीकी और नियामकीय मानकों को पूरा करती है।

एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी का दाहोद सोलर प्रोजेक्ट 68.22 मेगावाट क्षमता के साथ कमर्शियल ऑपरेशन में आना देश के स्वच्छ ऊर्जा अभियान के लिए अच्छी खबर है। 23 जुलाई 2026 से प्रभावी यह क्षमता आने वाले समय में गुजरात और पूरे देश को हरित ऊर्जा मुहैया कराने में मदद करेगी।

जैसे-जैसे भारत अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ा रहा है, ऐसे प्रोजेक्ट्स न सिर्फ पर्यावरण के लिए बल्कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।