एनएलसी इंडिया और सी-डैक ने ग्रीन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आगे बढ़ाने के लिए हाथ मिलाया
एमओयू का आदान-प्रदान श्री रामचंद्र पराशर, डायरेक्टर, एनआईआरएल और डॉ. एस.डी. सुदर्शन, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, सी-डैक के बीच हुआ। इस मौके पर श्री अमितेश कुमार सिन्हा, अतिरिक्त सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मीटी) तथा श्री आर.पी.एस. सिसोदिया, डायरेक्टर (प्लानिंग एंड प्रोजेक्ट्स), एनएलसीआईएल भी मौजूद रहे।

नई दिल्ली, सेमीकॉन इंडिया 2026 के दौरान एनएलसी इंडिया लिमिटेड (एनएलसीआईएल) और सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) के बीच एक महत्वपूर्ण साझेदारी हुई है। एनएलसी इंडिया की पूर्ण स्वामित्व वाली ग्रीन एनर्जी सब्सिडियरी एनएलसी इंडिया रिन्यूएबल्स लिमिटेड (एनआईआरएल) के जरिए यह सहयोग ग्रीन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस्ड कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजीज के क्षेत्र में संभावनाओं को तलाशने के लिए किया गया है।
एमओयू का आदान-प्रदान श्री रामचंद्र पराशर, डायरेक्टर, एनआईआरएल और डॉ. एस.डी. सुदर्शन, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, सी-डैक के बीच हुआ। इस मौके पर श्री अमितेश कुमार सिन्हा, अतिरिक्त सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (मीटी) तथा श्री आर.पी.एस. सिसोदिया, डायरेक्टर (प्लानिंग एंड प्रोजेक्ट्स), एनएलसीआईएल भी मौजूद रहे।
साझेदारी का उद्देश्य क्या है?
यह सहयोग एनआईआरएल की सोलर, विंड और एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स में बढ़ती क्षमता को सी-डैक की एडवांस्ड कंप्यूटिंग और डिजिटल टेक्नोलॉजीज की विशेषज्ञता से जोड़ता है। दोनों संगठन मिलकर ऐसे रिन्यूएबल एनर्जी-पावर्ड डेटा सेंटर विकसित करने की संभावना तलाशेंगे जो टिकाऊ और ऊर्जा-कुशल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर सकें।
भारत में डेटा सेंटर की मांग तेजी से बढ़ रही है। साथ ही देश स्वच्छ ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूती देने पर फोकस कर रहा है। ऐसे में ग्रीन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है। यह साझेदारी ठीक उसी दिशा में एक ठोस कदम है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह सहयोग?
- रिन्यूएबल एनर्जी और डिजिटल टेक्नोलॉजी का मेल: एनएलसी इंडिया कोयला मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख नवरत्न सीपीएसई है। इसकी सब्सिडियरी एनआईआरएल सोलर, विंड और स्टोरेज प्रोजेक्ट्स में सक्रिय है। सी-डैक एडवांस्ड कंप्यूटिंग और डिजिटल समाधानों में देश की अग्रणी संस्था है। दोनों की ताकत मिलकर टिकाऊ डेटा सेंटर मॉडल तैयार कर सकती है।
- ऊर्जा-कुशल डेटा सेंटर: पारंपरिक डेटा सेंटर बहुत ज्यादा बिजली खपत करते हैं। रिन्यूएबल एनर्जी से चलने वाले डेटा सेंटर न केवल कार्बन फुटप्रिंट कम करेंगे बल्कि ऑपरेशनल कॉस्ट भी घटा सकते हैं।
- सरकार की प्राथमिकताओं से मेल: मीटी और कोयला मंत्रालय दोनों इस सहयोग का समर्थन कर रहे हैं। यह भारत की डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और नेट-जीरो लक्ष्यों के अनुरूप है।
आगे क्या हो सकता है?
एमओयू के तहत दोनों पक्ष टेक्नोलॉजी सपोर्ट, कंसल्टेंसी और संभावित पायलट प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे। राज्य-स्तरीय या क्षेत्रीय स्तर पर ग्रीन डेटा सेंटर स्थापित करने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। इससे न सिर्फ डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा बल्कि स्थानीय रोजगार और कौशल विकास के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
एनएलसी इंडिया लंबे समय से ऊर्जा क्षेत्र में काम कर रही है। अब वह अपने ग्रीन एनर्जी पोर्टफोलियो को डिजिटल क्षेत्र से जोड़कर नई दिशा दे रही है। सी-डैक की तकनीकी विशेषज्ञता इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
एनएलसी इंडिया और सी-डैक का यह सहयोग भारत में ग्रीन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। रिन्यूएबल एनर्जी से संचालित डेटा सेंटर न केवल पर्यावरण के अनुकूल होंगे बल्कि देश की बढ़ती डिजिटल जरूरतों को भी पूरा करने में मददगार साबित हो सकते हैं। सेमीकॉन इंडिया 2026 के मंच पर हुई यह साझेदारी आने वाले वर्षों में और अधिक ठोस परियोजनाओं का आधार बन सकती है।
