पेंशन सखियों से ग्रामीण भारत में रिटायरमेंट सुरक्षा का नया अध्याय
यह समझौता श्री अमित शुक्ला, संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास विभाग और सुश्री सुमीत कौर कपूर, कार्यकारी निदेशक, पीएफआरडीए के बीच हुआ। मौके पर ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री रोहित कंसल भी मौजूद रहे।

ग्रामीण परिवारों तक पेंशन जागरूकता और रिटायरमेंट सुरक्षा पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ग्रामीण विकास विभाग (DoRD) और पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने आज एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसका मकसद पूरे ग्रामीण भारत में ‘पेंशन सखी’ नामक सामुदायिक आउटरीच व्यवस्था बनाना और उसे मजबूत करना है।
यह समझौता श्री अमित शुक्ला, संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास विभाग और सुश्री सुमीत कौर कपूर, कार्यकारी निदेशक, पीएफआरडीए के बीच हुआ। मौके पर ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री रोहित कंसल भी मौजूद रहे।
महिलाओं के नेतृत्व वाले समूहों की ताकत का इस्तेमाल
इस साझेदारी का मुख्य आधार दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत बनी विशाल सामुदायिक संस्थागत संरचना है। इसमें बैंकिंग कॉरेस्पॉन्डेंट (बीसी) सखियां और अन्य प्रशिक्षित सामुदायिक संसाधन व्यक्ति शामिल हैं। महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की यह व्यवस्था अब पेंशन कवरेज की सबसे बड़ी चुनौती को हल करने में मदद करेगी—वे परिवार जो औपचारिक वित्तीय सलाह और रिटायरमेंट प्लानिंग सेवाओं तक आसानी से नहीं पहुंच पाते।
पेंशन सखियां भरोसेमंद सामुदायिक सुविधाकर्ता के रूप में काम करेंगी। वे खासकर एसएचजी सदस्यों, ग्रामीण महिलाओं, लखपति दीदियों और अन्य ग्रामीण प्रतिभागियों तक पहुंचेंगी। उनका काम होगा पेंशन और रिटायरमेंट प्लानिंग की सही जानकारी देना, नामांकन में मदद करना और पेंशन संबंधी सेवाओं को समझने में सहायता करना।
क्यों जरूरी है यह पहल?
ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार अभी भी नियमित आय के बावजूद रिटायरमेंट के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं बना पाते। औपचारिक वित्तीय सलाह की कमी और जागरूकता का अभाव इसके बड़े कारण हैं। पेंशन सखियों के माध्यम से यह जानकारी अब गांव-गांव, टोले-टोले तक पहुंच सकेगी। महिलाओं के समूहों की विश्वसनीयता और पहुंच का इस्तेमाल करके नामांकन प्रक्रिया आसान बनेगी और बाद की सेवाओं में भी सहयोग मिलेगा।
यह साझेदारी सिर्फ जागरूकता तक सीमित नहीं रहेगी। यह वित्तीय साक्षरता बढ़ाने, पेंशन योजनाओं में नामांकन को बढ़ावा देने और ग्रामीण परिवारों को दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा देने की दिशा में ठोस प्रयास है। लखपति दीदियों जैसी सफल महिलाओं को जोड़कर यह मॉडल और प्रभावी हो सकता है।
ग्रामीण विकास विभाग और पीएफआरडीए का यह सहयोग ग्रामीण भारत में पेंशन कवरेज बढ़ाने का एक व्यावहारिक और टिकाऊ रास्ता खोलता है। अगर यह पहल सही तरीके से लागू होती है तो आने वाले वर्षों में लाखों ग्रामीण परिवार रिटायरमेंट के प्रति ज्यादा सुरक्षित महसूस कर सकेंगे।
मुख्य बातें एक नजर में:
- ग्रामीण विकास विभाग और पीएफआरडीए के बीच पेंशन सखी कार्यक्रम के लिए एमओयू
- DAY-NRLM के एसएचजी नेटवर्क और बीसी सखियों का उपयोग
- ग्रामीण महिलाओं, एसएचजी सदस्यों और लखपति दीदियों पर विशेष फोकस
- पेंशन जागरूकता, नामांकन और बाद की सहायता का लक्ष्य
यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को रिटायरमेंट सुरक्षा से जोड़ने की दिशा में सकारात्मक संकेत है।
