राष्ट्रपति ने दिल्ली, जम्मू-कश्मीर-लद्दाख, झारखंड और कर्नाटक हाईकोर्ट में 14 न्यायिक अधिकारियों को न्यायाधीश और अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया
ये नियुक्तियां राजधानी के उच्च न्यायालय में न्यायिक संसाधन बढ़ाने में मदद करेंगी, जहां बड़ी संख्या में सिविल, आपराधिक और संवैधानिक मामले लंबित रहते हैं।

नई दिल्ली, 19 सितंबर 2026। राष्ट्रपति ने संविधान के प्रावधानों के तहत और भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद दिल्ली, जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख, झारखंड तथा कर्नाटक उच्च न्यायालयों में कुल 14 न्यायिक अधिकारियों को न्यायाधीश और अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त करने की घोषणा की है। कानून और न्याय मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार ये नियुक्तियां उच्च न्यायालयों की कार्यक्षमता बढ़ाने और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही हैं।
दिल्ली उच्च न्यायालय में सात नियुक्तियां
दिल्ली हाईकोर्ट में दो न्यायाधीश और पांच अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किए गए हैं।
न्यायाधीश के रूप में: श्रीमती निवेदिता अनिल शर्मा और श्रीमती निशा सहाय सक्सेना।
अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में: संजय शर्मा, भरत पराशर, डॉ. (श्रीमती) अदिति चौधरी, दिनेश भट्ट और अरुण भारद्वाज।
ये नियुक्तियां राजधानी के उच्च न्यायालय में न्यायिक संसाधन बढ़ाने में मदद करेंगी, जहां बड़ी संख्या में सिविल, आपराधिक और संवैधानिक मामले लंबित रहते हैं।
जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय
यश पॉल बौर्नी को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक और कानूनी जरूरतों को देखते हुए यह नियुक्ति महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
झारखंड उच्च न्यायालय में तीन न्यायाधीश
झारखंड हाईकोर्ट में मनोज प्रसाद, अखिल कुमार और राम शर्मा को न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। राज्य में खनन, भूमि और आपराधिक मामलों की अधिकता को देखते हुए इन नियुक्तियों से न्यायिक प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
कर्नाटक उच्च न्यायालय में तीन अतिरिक्त न्यायाधीश
कर्नाटक हाईकोर्ट में श्रीमती उषारानी, के.एस. भरत कुमार और श्रीमती नेराले वी. भवानी को अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। बेंगलुरु सहित राज्य के अन्य क्षेत्रों में बढ़ते मुकदमों को देखते हुए ये नियुक्तियां स्वागत योग्य हैं।
नियुक्ति प्रक्रिया और महत्व
ये सभी नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेदों के तहत राष्ट्रपति द्वारा की गई हैं। प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श अनिवार्य रूप से लिया गया। उच्च न्यायालयों में न्यायिक अधिकारियों की पदोन्नति से न केवल अनुभव का लाभ मिलता है, बल्कि न्यायपालिका में विविधता और दक्षता भी बढ़ती है।
कानून और न्याय मंत्रालय के अनुसार, इन 14 अधिकारियों की नियुक्ति से संबंधित उच्च न्यायालयों में जजों की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे मामलों के निपटारे की गति तेज होने की संभावना है। नागरिकों को समय पर न्याय मिलने की दिशा में यह एक सकारात्मक कदम है।
यह जानकारी कानून और न्याय मंत्रालय की आधिकारिक विज्ञप्ति (रिलीज आईडी: 2312339) पर आधारित है, जो 19 सितंबर 2026 को जारी की गई।
