इस्पात मंत्रालय ने शुरू किया स्पेशल कैंपेन 6.0: 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा बड़ा अभियान
पिछले साल अक्टूबर 2025 में चलाए गए स्पेशल कैंपेन 5.0 के दौरान मंत्रालय और उसके PSUs ने उल्लेखनीय प्रगति की थी। लंबित मामलों का निपटारा, पुरानी फाइलों का निस्तारण और जगह का बेहतर उपयोग जैसे क्षेत्रों में अच्छे नतीजे मिले थे। इन प्रयासों ने स्थायी रिकॉर्ड प्रबंधन और सेवा वितरण में सुधार की मजबूत नींव रखी। अब स्पेशल कैंपेन 6.0 इन्हीं उपलब्धियों को आगे बढ़ाने का काम करेगा।

नई दिल्ली। इस्पात मंत्रालय और उसके सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) स्पेशल कैंपेन 6.0 में सक्रिय रूप से हिस्सा लेने जा रहे हैं। यह अभियान 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य स्वच्छता, स्थिरता और कुशल शासन को और मजबूत बनाना है। खास तौर पर इस बार ई-वेस्ट के प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान पर विशेष जोर दिया गया है।
पिछले साल अक्टूबर 2025 में चलाए गए स्पेशल कैंपेन 5.0 के दौरान मंत्रालय और उसके PSUs ने उल्लेखनीय प्रगति की थी। लंबित मामलों का निपटारा, पुरानी फाइलों का निस्तारण और जगह का बेहतर उपयोग जैसे क्षेत्रों में अच्छे नतीजे मिले थे। इन प्रयासों ने स्थायी रिकॉर्ड प्रबंधन और सेवा वितरण में सुधार की मजबूत नींव रखी। अब स्पेशल कैंपेन 6.0 इन्हीं उपलब्धियों को आगे बढ़ाने का काम करेगा।
अभियान की दो मुख्य चरण
स्पेशल कैंपेन 6.0 को दो चरणों में चलाया जाएगा:
- तैयारी चरण (15 से 30 सितंबर 2026): इस दौरान लक्ष्य तय किए जाएंगे और जमीनी स्तर पर तैयारी शुरू होगी।
- कार्यान्वयन चरण (2 से 31 अक्टूबर 2026): इस चरण में योजनाओं को लागू किया जाएगा, नियमित निगरानी रखी जाएगी और ठोस नतीजे हासिल करने पर फोकस रहेगा।
मंत्रालय का कहना है कि इस अभियान के जरिए न सिर्फ कार्यालयों और PSUs में स्वच्छता का स्तर बढ़ेगा, बल्कि ई-वेस्ट प्रबंधन को भी व्यवस्थित रूप से मजबूत किया जाएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रशासनिक दक्षता में भी सुधार आने की उम्मीद है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह अभियान?
भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में स्पेशल कैंपेन एक नियमित पहल बन चुका है। यह सिर्फ सफाई का कार्यक्रम नहीं, बल्कि लंबित कार्यों के निपटारे, रिकॉर्ड प्रबंधन और संसाधनों के बेहतर उपयोग का अवसर भी है। इस्पात मंत्रालय ने पिछले कैंपेन में अच्छा प्रदर्शन किया था, इसलिए इस बार अपेक्षाएं और ऊंची हैं।
ई-वेस्ट पर विशेष ध्यान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डिजिटल उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल से इलेक्ट्रॉनिक कचरा भी तेजी से बढ़ रहा है। सही तरीके से संग्रह, अलग-अलग करना और निपटान करने से पर्यावरण को नुकसान कम होता है और मूल्यवान धातुओं को दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है।
आगे क्या?
अभियान के दौरान मंत्रालय और उसके PSUs नियमित रूप से प्रगति की रिपोर्ट साझा करेंगे। नागरिक भी अपने आसपास के सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता और ई-वेस्ट प्रबंधन संबंधी गतिविधियों को देख सकेंगे। यह पहल न सिर्फ मंत्रालय बल्कि पूरे सरकारी तंत्र में अच्छी प्रथाओं को बढ़ावा देने का माध्यम बनेगी।
स्पेशल कैंपेन 6.0 इस्पात मंत्रालय की स्वच्छता, स्थिरता और कुशल शासन के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराता है। 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस एक महीने के अभियान से ठोस और मापने योग्य परिणाम निकलने की उम्मीद है।
