वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुद्रा लाभार्थियों के लिए बैंकों से वित्तीय साक्षरता बढ़ाने की अपील की
नागालैंड की एक उद्यमी ने बातचीत के दौरान यह मुद्दा उठाया कि छोटे व्यवसायों में वित्तीय सेवाओं और ऋण की समझ बढ़ाने की जरूरत है। उनकी नेटवर्क 10 से अधिक जिलों में लोगों को वित्तीय सेवाएं समझाने और ऋण उपलब्ध कराने का काम कर रही है। इसी के बाद वित्त मंत्री ने बैंकों को हर राज्य में वित्तीय साक्षरता अभियान चलाने की बात कही।

केंद्र की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएम मुद्रा योजना) के तहत ऋण देने वाले बैंकों से कहा है कि वे पूरे देश में वित्तीय साक्षरता के प्रयासों को तेज करें। उनका मकसद छोटे उद्यमियों को अपना व्यवसाय बढ़ाने और योजना के दायरे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को लाने में मदद करना है।
नागालैंड की एक उद्यमी ने बातचीत के दौरान यह मुद्दा उठाया कि छोटे व्यवसायों में वित्तीय सेवाओं और ऋण की समझ बढ़ाने की जरूरत है। उनकी नेटवर्क 10 से अधिक जिलों में लोगों को वित्तीय सेवाएं समझाने और ऋण उपलब्ध कराने का काम कर रही है। इसी के बाद वित्त मंत्री ने बैंकों को हर राज्य में वित्तीय साक्षरता अभियान चलाने की बात कही।
वित्तीय साक्षरता क्यों जरूरी है मुद्रा लाभार्थियों के लिए?
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि वित्तीय जागरूकता से उद्यमी ऋण का बेहतर इस्तेमाल कर सकते हैं और अपना व्यवसाय आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने बताया कि मुद्रा ऋण समय पर चुकाने से लाभार्थी का क्रेडिट रिकॉर्ड बनता है। इससे आगे चलकर बड़े ऋण और नियमित बैंकिंग सुविधाएं हासिल करना आसान हो जाता है।
पीएम मुद्रा योजना की खास बात यह है कि इसमें बिना किसी गारंटी या कोलैटरल के ऋण मिलता है। जो छोटे उद्यमी संपत्ति नहीं रख पाते, वे भी औपचारिक वित्त व्यवस्था से जुड़ सकते हैं। वित्तीय साक्षरता बढ़ाने से ऐसे लाभार्थी ऋण का सही उपयोग सीखेंगे, व्यवसाय बढ़ाएंगे और योजना का लाभ और ज्यादा लोगों तक पहुंचेगा।
बैंकों की भूमिका और आगे का रास्ता
वित्त मंत्री ने कहा कि मुद्रा ऋण देने वाले बैंकों को हर राज्य में वित्तीय साक्षरता के प्रयास करने चाहिए। इससे न केवल मौजूदा लाभार्थियों को फायदा होगा, बल्कि नए उद्यमियों को भी योजना से जोड़ने में मदद मिलेगी। छोटे व्यवसायियों को बैंकिंग सेवाओं, ऋण प्रबंधन, बचत और व्यवसाय विस्तार की जानकारी मिलने से अर्थव्यवस्था के निचले स्तर पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
नागालैंड की उद्यमी के अनुभव से साफ है कि स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने से वास्तविक बदलाव आता है। अगर बैंक और संबंधित संस्थाएं इस दिशा में सक्रिय हों, तो मुद्रा योजना और अधिक प्रभावी साबित हो सकती है।
छोटे उद्यमियों के लिए यह संदेश साफ है—समय पर ऋण चुकाएं, वित्तीय समझ बढ़ाएं और अपना व्यवसाय आगे बढ़ाएं। वित्त मंत्री के इस आह्वान से उम्मीद है कि बैंक वित्तीय साक्षरता को प्राथमिकता देंगे और मुद्रा लाभार्थियों को मजबूत बनाने में मदद करेंगे।
