Welspun Living Q2 नतीजे: कंपनी ने 30 अक्टूबर, 2026 को BSE में दाखिल अर्निंग्स प्रेजेंटेशन में बताया कि सितंबर में समाप्त तिमाही में उसका शुद्ध मुनाफा ₹169 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹13 करोड़ था। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के इन अनऑडिटेड नतीजों में कुल आय 16.9% बढ़कर ₹2,870 करोड़ रही। कंपनी सितंबर के अंत तक नेट-कैश स्थिति में भी आ गई।

तिमाही में EBITDA सालाना आधार पर 120% बढ़कर ₹370 करोड़ पहुंचा। EBITDA मार्जिन 12.9% रहा, जिसमें कंपनी के अनुसार 604 आधार अंकों का सुधार हुआ। पिछली तिमाही के मुकाबले कुल आय 1.5% और शुद्ध मुनाफा 5.2% बढ़ा।

प्रस्तुति में शुद्ध मुनाफा अल्पांश हित और असाधारण मद के बाद बताया गया है। वित्तीय विवरण में ₹7.2 करोड़ की असाधारण मद का उल्लेख है। गैर-वार्षिकीकृत प्रति शेयर आय ₹1.80 रही, जो एक साल पहले ₹0.13 थी।

होम टेक्सटाइल और फ्लोरिंग में बढ़ी आय

कंपनी के दोनों प्रमुख कारोबारों ने सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की। होम टेक्सटाइल निर्यात में 18.3% और घरेलू कारोबार में 28.2% की बढ़ोतरी हुई। घरेलू होम टेक्सटाइल कारोबार 26.3%, जबकि घरेलू फ्लोरिंग कारोबार 33.4% बढ़ा।

  • होम टेक्सटाइल की आय 15.8% बढ़कर ₹2,689 करोड़ रही। इस कारोबार का EBITDA ₹323 करोड़ और मार्जिन 12.0% रहा।
  • फ्लोरिंग की आय 19.3% बढ़कर ₹216 करोड़ हुई। EBITDA ₹23 करोड़ और मार्जिन 10.8% रहा, जबकि पिछले साल मार्जिन 2.1% था।
  • कुल ब्रांडेड कारोबार में 32% वृद्धि हुई और आय में इसका योगदान करीब 22% रहा।

कंपनी के अनुसार, इनोवेशन से जुड़े कारोबार में 46% वृद्धि हुई और बिक्री में इसकी हिस्सेदारी करीब 25% रही। पिलो कारोबार पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले 2.4 गुना रहा।

नकदी और कार्यशील पूंजी की स्थिति

सितंबर 2026 के अंत में कंपनी ने ₹2 करोड़ की नेट-कैश स्थिति दिखाई, जबकि मार्च 2026 में शुद्ध कर्ज ₹775 करोड़ था। सकल कर्ज ₹1,905 करोड़ और नकदी एवं समकक्ष ₹1,906 करोड़ रहे। कंपनी का कैश कन्वर्जन चक्र 44 दिन रह गया, जो मार्च में 82 दिन था।

प्रबंध निदेशक एवं CEO Dipali Goenka ने नेट-कैश स्थिति को नकदी सृजन, कार्यशील पूंजी की दक्षता और अनुशासित पूंजी आवंटन से जोड़ा। उन्होंने कहा कि FY27 में कंपनी की प्राथमिकताएं दो अंकों में राजस्व वृद्धि बनाए रखना, EBITDA मार्जिन शुरुआती दहाई के स्तर पर रखना, पूंजी पर प्रतिफल सुधारना और मजबूत नकदी प्रवाह उत्पन्न करना हैं। ये प्रबंधन की आगे की प्राथमिकताएं हैं।