हैदराबाद: स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएआईएल) ने प्रोजेक्ट 28 के तहत निर्मित स्वदेशी एंटी-सबमरीन वारफेयर (एएसडब्ल्यू) स्टील्थ कार्वेट आईएनएस किल्तन के लिए डीएमआर 249ए रक्षा-ग्रेड स्टील प्लेट्स की आपूर्ति की है। यह वारशिप-ग्रेड स्टील एसएआईएल ने डिफेंस मेटलर्जिकल रिसर्च लैबोरेटरी (डीएमआरएल), हैदराबाद के सहयोग से विकसित किया है।

आईएनएस किल्तन में स्वदेशी रूप से विकसित डीएमआर 249ए स्टील का उपयोग भारतीय स्टील की नौसेना जहाज निर्माण कार्यक्रम को समर्थन देने की बढ़ती क्षमता को रेखांकित करता है। यह आत्मानिर्भर भारत पहल के तहत रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में हुई प्रगति को भी दर्शाता है।

स्वदेशी स्टील से मजबूत होती भारतीय नौसेना

डीएमआर 249ए स्टील विशेष रूप से युद्धपोतों के लिए डिजाइन किया गया उच्च-शक्ति वाला मिश्र धातु है। इसे भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित किया गया है ताकि जहाजों को हल्का, मजबूत और स्टील्थ क्षमता वाला बनाया जा सके। एसएआईएल और डीएमआरएल के संयुक्त प्रयास से यह स्टील अब पूरी तरह स्वदेशी है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो रही है।

आईएनएस किल्तन प्रोजेक्ट 28 की श्रृंखला का हिस्सा है। इस परियोजना के तहत भारत अपनी एंटी-सबमरीन क्षमताओं को बढ़ा रहा है। स्वदेशी स्टील प्लेट्स के इस्तेमाल से न केवल निर्माण लागत नियंत्रित रहती है बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता भी बढ़ती है।

आत्मानिर्भर भारत और रक्षा क्षेत्र में योगदान

आत्मानिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में स्वदेशीकरण पर जोर दिया जा रहा है। एसएआईएल जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। डीएमआर 249ए स्टील जैसी सामग्रियों का विकास भारत को वैश्विक स्तर पर रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में मजबूत बना रहा है।

यह आपूर्ति भारतीय स्टील उद्योग की तकनीकी क्षमता का प्रमाण है। हैदराबाद स्थित डीएमआरएल के साथ साझेदारी ने शोध और उत्पादन के बीच की खाई को पाटने में मदद की है। परिणामस्वरूप, भारतीय नौसेना को उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री समय पर उपलब्ध हो रही है।

भविष्य की संभावनाएं

आईएनएस किल्तन जैसे जहाजों में स्वदेशी सामग्री का उपयोग आने वाले वर्षों में और बढ़ने की उम्मीद है। इससे न केवल नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता मजबूत होगी बल्कि घरेलू उद्योग को भी नई तकनीक और रोजगार के अवसर मिलेंगे। एसएआईएल लगातार रक्षा-ग्रेड स्टील के और उन्नत ग्रेड विकसित करने पर काम कर रहा है।

भारतीय रक्षा क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है जो आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम को दर्शाता है।