मजगांव डॉक आंध्र प्रदेश में लगाएगा नया ग्रीनफील्ड शिपयार्ड, 15,000 करोड़ का निवेश और 45,000 रोजगार का वादा
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की उपस्थिति में यह एमओयू साइन हुआ। एमडीएल के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर कैप्टन जगमोहन (रिटायर्ड) और एनएसएचआईपी-एपी के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रवीण अधित्य सी.वी. (आईएएस) ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।

आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के डुगराजपट्टनम में जहाज निर्माण का एक बड़ा अध्याय शुरू होने जा रहा है। रक्षा मंत्रालय के अधीन नवरात्न पीएसयू मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने शुक्रवार को नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क-एपी (एनएसएचआईपी-एपी) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के तहत एमडीएल यहां आधुनिक ग्रीनफील्ड शिपयार्ड विकसित करेगा।
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की उपस्थिति में यह एमओयू साइन हुआ। एमडीएल के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर कैप्टन जगमोहन (रिटायर्ड) और एनएसएचआईपी-एपी के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रवीण अधित्य सी.वी. (आईएएस) ने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए।
कितना निवेश, कितने रोजगार?
एमडीएल अगले पांच से सात साल में करीब 15,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। परियोजना से सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 45,000 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। शिपयार्ड की डिजाइन क्षमता सालाना 1.2 मिलियन ग्रॉस टन होगी। जरूरत पड़ने पर इसे और बढ़ाया जा सकता है।
यहां टैंकर्स, बल्क कैरियर्स, कंटेनर शिप, एलएनजी कैरियर्स और अन्य बड़े विशेष जहाज बनाए जाएंगे। घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात पर भी ध्यान रहेगा। यह शिपयार्ड डुगराजपट्टनम शिपबिल्डिंग-कम-पोर्ट क्लस्टर का एंकर शिपयार्ड बनेगा।
टेक्नो-इकोनॉमिक फीजिबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार पूरे शिपबिल्डिंग और शिप रिपेयर यार्ड की अनुमानित लागत करीब 29,254 करोड़ रुपये है, जबकि पोर्ट के लिए 9,513 करोड़ रुपये का प्रावधान है। पोर्ट केंद्र सरकार विकसित करेगी। यह पूरा क्लस्टर भारत सरकार की शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम के तहत आगे बढ़ रहा है।
एनएसएचआईपी-एपी आंध्र प्रदेश मैरीटाइम बोर्ड और विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी का संयुक्त विशेष प्रयोजन वाहन है। राज्य सरकार भूमि और बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराएगी तथा जरूरी मंजूरी दिलाने में मदद करेगी।
आंध्र प्रदेश के लिए क्या मायने रखता है?
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि यह परियोजना आंध्र प्रदेश को देश का प्रमुख शिपबिल्डिंग हब बनाने में मदद करेगी। साथ ही भारत को 2047 तक दुनिया के टॉप पांच शिपबिल्डिंग देशों में लाने के लक्ष्य को भी बल मिलेगा। स्थानीय स्तर पर जहाज निर्माण, मरीन इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़े कई सहायक उद्योग भी पनपेंगे।
एमडीएल अब तक मुख्य रूप से युद्धपोत और पनडुब्बी बनाने में जानी जाती रही है। वाणिज्यिक जहाज निर्माण में यह उसका बड़ा कदम है। डुगराजपट्टनम की भौगोलिक स्थिति और समुद्री संभावनाओं को देखते हुए कंपनी का मानना है कि यहां विश्व स्तर का प्रतिस्पर्धी शिपयार्ड खड़ा किया जा सकता है।
यह समझौता सिर्फ एक शिपयार्ड का नहीं है। यह पूर्वी तट पर बड़े पैमाने पर नौवहन उद्योग विकसित करने की दिशा में एक ठोस शुरुआत है। आंध्र प्रदेश सरकार लंबे समय से डुगराजपट्टनम को शिपबिल्डिंग क्लस्टर के रूप में विकसित करने की योजना पर काम कर रही थी। अब मजगांव डॉक जैसे अनुभवी खिलाड़ी के आने से योजना को रफ्तार मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
परियोजना को अभी मंजूरी और क्लियरेंस की प्रक्रिया से गुजरना होगा। लेकिन एमओयू साइन होने के साथ ही राज्य में नई आर्थिक गतिविधि और रोजगार के अवसर खुलने का रास्ता साफ हो गया है। आने वाले वर्षों में डुगराजपट्टनम का नाम देश के बड़े जहाज निर्माण केंद्रों में गिना जा सकता है।
