केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम पर कॉन्सेप्ट पेपर का किया शुभारंभ
यह पहल भारत को क्रिटिकल मिनरल्स के आयात पर निर्भरता कम करने और इन जरूरी संसाधनों की टिकाऊ व सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला बनाने में मदद करेगी। क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकल, रेयर अर्थ एलिमेंट्स आदि इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी हैं। देश में इनकी सीमित उपलब्धता को देखते हुए रीसाइक्लिंग और अर्बन माइनिंग अब रणनीतिक जरूरत बन चुकी है।

नई दिल्ली। भारत की खनिज सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम पर कॉन्सेप्ट पेपर का शुभारंभ किया। इस मौके पर खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे, खान मंत्रालय के सचिव श्री केशव चंद्र, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और मैटीरियल रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एमआरएआई) के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
यह पहल भारत को क्रिटिकल मिनरल्स के आयात पर निर्भरता कम करने और इन जरूरी संसाधनों की टिकाऊ व सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला बनाने में मदद करेगी। क्रिटिकल मिनरल्स जैसे लिथियम, कोबाल्ट, निकल, रेयर अर्थ एलिमेंट्स आदि इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, सोलर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा क्षेत्र के लिए बेहद जरूरी हैं। देश में इनकी सीमित उपलब्धता को देखते हुए रीसाइक्लिंग और अर्बन माइनिंग अब रणनीतिक जरूरत बन चुकी है।
रीसाइक्लिंग से आत्मनिर्भरता की राह
कॉन्सेप्ट पेपर का उद्देश्य देश में क्रिटिकल मिनरल्स के रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम को मजबूत करना है। इसमें ई-वेस्ट, इस्तेमाल हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों और औद्योगिक स्क्रैप से मूल्यवान खनिजों को निकालने पर जोर दिया गया है। सरकार पहले ही नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के तहत रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। इससे न सिर्फ आयात बिल घटेगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण और रोजगार सृजन भी होगा।
खान मंत्रालय और एमआरएआई के सहयोग से तैयार इस दस्तावेज में नीतिगत सुझाव, तकनीकी चुनौतियां और उद्योग की भूमिका स्पष्ट की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही संग्रह, प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग व्यवस्था से भारत अपनी क्रिटिकल मिनरल्स जरूरत का 25-30 प्रतिशत हिस्सा रीसाइक्लिंग से पूरा कर सकता है।
टिकाऊ आपूर्ति श्रृंखला का लक्ष्य
श्री जी. किशन रेड्डी ने इस अवसर पर कहा कि क्रिटिकल मिनरल्स अब सिर्फ आर्थिक संसाधन नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा संक्रमण का आधार हैं। अर्बन माइनिंग के जरिए पुराने मोबाइल, लैपटॉप, बैटरियों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कचरे से खनिज निकालना पर्यावरण के अनुकूल और लागत प्रभावी तरीका है। सरकार राज्यों, उद्योग जगत और शोध संस्थानों के साथ मिलकर इस दिशा में काम कर रही है।
यह कदम मिशन लाइफ और सर्कुलर इकोनॉमी के लक्ष्यों से भी जुड़ा है। रीसाइक्लिंग इकाइयों को बढ़ावा देकर न केवल घरेलू क्षमता बढ़ेगी बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
कॉन्सेप्ट पेपर के शुभारंभ के साथ अब नीति निर्माण, प्रोत्साहन योजनाओं का विस्तार और उद्योग-सरकार साझेदारी पर फोकस रहेगा। एमआरएआई जैसे संगठनों की भागीदारी से व्यावहारिक सुझाव सामने आएंगे जो जमीन पर लागू हो सकें।
भारत क्रिटिकल मिनरल्स क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम को मजबूत करना इसी यात्रा का अहम पड़ाव है। इससे न सिर्फ आयात निर्भरता घटेगी बल्कि स्वच्छ ऊर्जा भविष्य और रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे।
(नोट: लेख में दी गई जानकारी उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और संबंधित विकास पर आधारित है।)
