RBA QIP के ₹500 करोड़ पूरी तरह इस्तेमाल, ICRA को कोई महत्वपूर्ण विचलन नहीं मिला
Restaurant Brands Asia ने QIP के ₹500 करोड़ का पूरा उपयोग किया। सितंबर तिमाही की निगरानी रिपोर्ट में नई रेस्तरां परियोजनाओं पर ₹325 करोड़ का उपयोग दर्ज है।

Restaurant Brands Asia Limited ने 29 अक्टूबर 2026 को BSE में दाखिल निगरानी रिपोर्टों में जुटाई गई पूंजी के उपयोग का ब्योरा दिया। RBA QIP के ₹500 करोड़ का पूरा उपयोग 30 सितंबर 2026 तक हो चुका था। ICRA की रिपोर्ट के अनुसार, रकम का उपयोग इश्यू के घोषित उद्देश्यों के अनुरूप रहा और कोई महत्वपूर्ण विचलन नहीं पाया गया।
कंपनी ने सितंबर तिमाही के लिए दो अलग रिपोर्ट सौंपी हैं। ICRA ने Qualified Institutions Placement यानी QIP की निगरानी की, जबकि India Ratings & Research ने निजी नियोजन के आधार पर हुए प्रेफरेंशियल इश्यू की रिपोर्ट तैयार की। प्रेफरेंशियल इश्यू की रिपोर्ट में भी घोषित उद्देश्यों से कोई विचलन नहीं पाया गया।
नई रेस्तरां परियोजनाओं पर ₹325 करोड़ का उपयोग
QIP की रकम में से सितंबर तिमाही के दौरान ₹77.15 करोड़ इस्तेमाल हुए। इसमें ₹73.44 करोड़ भारत में नए रेस्तरां स्थापित करने के लिए पूंजीगत खर्च और ₹3.71 करोड़ सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों पर लगाए गए। तिमाही की शुरुआत तक कुल ₹422.85 करोड़ इस्तेमाल हो चुके थे।
- नए रेस्तरां स्थापित करने के लिए निर्धारित पूरे ₹325 करोड़ का उपयोग हुआ।
- बकाया कर्ज के पूर्ण या आंशिक भुगतान के लिए आवंटित ₹72 करोड़ पहले ही इस्तेमाल हो चुके थे।
- सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए संशोधित ₹83.09 करोड़ का आवंटन भी पूरी तरह इस्तेमाल हुआ। इसमें वेतन, ब्याज और विक्रेताओं को भुगतान शामिल हैं।
₹500 करोड़ के कुल उपयोग में इश्यू संबंधी खर्च भी शामिल हैं। रिपोर्ट में कर्ज भुगतान और नए रेस्तरां संबंधी पूंजीगत खर्च को तय समय-सारणी के अनुरूप बताया गया है। सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों की शेष राशि का उपयोग वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में पूरा हुआ।
प्रेफरेंशियल इश्यू से ₹1,050 करोड़ प्राप्त
प्रेफरेंशियल इश्यू का कुल आकार ₹1,500 करोड़ है, लेकिन 30 सितंबर 2026 तक कंपनी को ₹1,050 करोड़ प्राप्त हुए थे। इसमें इक्विटी शेयरों से ₹900 करोड़ और परिवर्तनीय वारंट की अग्रिम सदस्यता राशि के तौर पर ₹150 करोड़ शामिल हैं।
वारंट के कुल मूल्य का 25% अग्रिम मिला है। शेष 75% सदस्यता राशि के लिए आवंटन से 18 महीने की अवधि निर्धारित है; इस दौरान वारंट एक या अधिक किस्तों में इक्विटी शेयरों में बदले जा सकते हैं।
दोनों निगरानी एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी रिपोर्ट ऑडिट नहीं है और वे प्राप्त सूचनाओं का स्वतंत्र सत्यापन नहीं करतीं। ICRA ने यह भी कहा कि रिपोर्ट खर्च की उपयुक्तता या उसके परिणामों का आश्वासन नहीं देती।
