Infronics Systems नतीजे: कंपनी ने 29 अक्टूबर 2026 को BSE में दाखिल सूचना में सितंबर तिमाही के लिए ₹19.13 लाख का शुद्ध घाटा दर्ज किया। बोर्ड ने सितंबर में समाप्त तिमाही और छमाही के अनऑडिटेड स्टैंडअलोन नतीजे मंजूर किए। साथ संलग्न सीमित समीक्षा रिपोर्ट में R. Subramanian & Company LLP ने कारोबार जारी रहने की धारणा पर आधारित लेखांकन को अनुचित बताते हुए प्रतिकूल निष्कर्ष दिया।

तिमाही घाटा पिछले साल की समान अवधि के ₹22.48 लाख से कम रहा, लेकिन जून 2026 तिमाही के ₹16.18 लाख से बढ़ा। कंपनी की सक्रिय आय अर्जित करने वाली कारोबारी गतिविधियां फिलहाल बंद हैं। कुल आय अन्य आय से आई।

वित्तीय आंकड़े सितंबर 2026 तिमाही सितंबर 2025 तिमाही
कुल आय ₹0.19 लाख ₹0.20 लाख
कुल खर्च ₹19.32 लाख ₹21.64 लाख
शुद्ध घाटा ₹19.13 लाख ₹22.48 लाख

सितंबर 2026 में समाप्त छमाही में शुद्ध घाटा ₹35.31 लाख रहा, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह ₹39.51 लाख था। छमाही की कुल आय ₹0.38 लाख रही।

ऑडिटर ने किन आधारों पर जताई आपत्ति?

ऑडिटर के अनुसार, बैंकों को SMS सेवाएं देने के लिए BSNL के साथ कंपनी के अनुबंध वित्त वर्ष 2024-25 में समाप्त हुए और उनका नवीनीकरण नहीं हुआ। ऑडिटर को कोई स्वीकृत कारोबारी योजना, पक्का ग्राहक अनुबंध या वित्तपोषण व्यवस्था नहीं दी गई, जिससे अगले कम-से-कम बारह महीनों के दायित्व पूरे करने की क्षमता स्थापित हो सके।

  • ₹253.68 लाख की नकदी और नकद समकक्ष में से ₹253.20 लाख बैंक खातों पर रोक के कारण तत्काल उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं थे। हाथ में नकदी ₹0.48 लाख थी।
  • Mudunuru Limited का ₹12,05,23,699 का विवादित दावा अनसुलझा है। इसमें मूल रकम ₹8,60,30,257 और ब्याज ₹3,44,93,442 शामिल हैं।

ऑडिटर ने इन परिस्थितियों को केवल अनिश्चितता से आगे की स्थिति बताते हुए कहा कि कंपनी के पास परिचालन बंद करने के अलावा कोई यथार्थवादी विकल्प नहीं है। उनके अनुसार, अलग लेखांकन आधार अपनाने के वित्तीय प्रभाव प्रबंधन ने निर्धारित नहीं किए हैं।

प्रबंधन ने लेखांकन आधार का बचाव किया

प्रबंधन ने कहा कि बोर्ड ने न तो कंपनी बंद करने का निर्णय लिया है, न उसका ऐसा इरादा है। कंपनी बैंक खातों की पाबंदियां हटवाने के लिए कानूनी प्रयास कर रही है और तकनीकी उत्पाद के अनुसंधान एवं विकास सहित अवसर तलाश रही है।

कंपनी ने Mudunuru Limited की देनदारी नकारी है। कानूनी सलाह के आधार पर उसने कोई प्रावधान नहीं बनाया और दावे को आकस्मिक देनदारी बताया है। बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए R & A Associates को सचिवीय ऑडिटर भी नियुक्त किया।