भारत के समुद्री क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाया गया है। बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अंतर्गत कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) तथा डीपी वर्ल्ड की कंपनी ड्राइडॉक्स वर्ल्ड ने कोच्चि स्थित इंटरनेशनल शिप रिपेयर फैसिलिटी (आईएसआरएफ) के संचालन के लिए संयुक्त उद्यम समझौता किया है। यह साझेदारी कोच्चि को प्रमुख शिप रिपेयर केंद्र बनाने और भारत को वैश्विक समुद्री सेवाओं का पसंदीदा गंतव्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

समझौते की मुख्य बातें

यह 50:50 का संयुक्त उद्यम है। समझौते पर ड्राइडॉक्स वर्ल्ड के सीईओ कैप्टन राडो एंटोलोविक और सीएसएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक जोस वी.जे. ने हस्ताक्षर किए। यह घटना ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान नई दिल्ली में हुई। इस मौके पर केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल तथा यूएई के सहायक विदेश मंत्री ओमरान शaraf अलहाशिमी भी मौजूद रहे।

यह साझेदारी भारत मेरिटाइम वीक 2025 में दोनों पक्षों के बीच हुए एमओयू पर आधारित है। आईएसआरएफ कोच्चि के विलिंगडन द्वीप पर स्थित है। यह सुविधा 2024 में शुरू हुई थी और व्यावसायिक तथा नौसेना जहाजों की मरम्मत, रखरखाव और ओवरहॉल का काम करती है। अब संयुक्त उद्यम इसे और विस्तार देगा ताकि बड़े और ज्यादा जहाजों की सेवा संभव हो सके।

क्यों है यह समझौता खास?

सीएसएल के पास मजबूत स्थानीय अनुभव, कुशल कर्मचारी और इंजीनियरिंग क्षमता है। ड्राइडॉक्स वर्ल्ड के पास उच्च स्तर की जहाज मरम्मत, बड़े रूपांतरण और ऑफशोर प्रोजेक्ट्स का वैश्विक अनुभव है। दोनों के मिलने से भारत की शिप रिपेयर क्षमता बढ़ेगी। कोच्चि प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों पर स्थित है, इसलिए यहां मरम्मत सुविधा का विस्तार विदेशी जहाजों को भी आकर्षित करेगा।

यह सार्वजनिक-निजी भागीदारी भारत के शिप रिपेयर क्षेत्र में अपनी तरह का पहला बड़ा प्रयास है। इससे केरल में नौकरियां बढ़ेंगी, कौशल विकास होगा और समुद्री इंजीनियरिंग, फैब्रिकेशन जैसी सहायक सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। सरकार की मेरिटाइम अमृत काल विजन 2047 (MAKV2047) के लक्ष्य—आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री क्षेत्र—की दिशा में यह कदम मेल खाता है।

कोच्चि और भारत के लिए फायदे

  • कोच्चि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए प्रमुख मरम्मत केंद्र बन सकता है।
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और युवाओं के लिए उच्च कौशल वाले रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
  • भारत की मरम्मत क्षमता बढ़ने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और देश वैश्विक समुद्री सेवा बाजार में मजबूत स्थिति हासिल कर सकेगा।
  • जहाज मरम्मत, इंजीनियरिंग और संबंधित सेवाओं का पूरा क्लस्टर विकसित होने की संभावना है।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस साझेदारी को भारत के शिप रिपेयर इकोसिस्टम को मजबूत करने और केरल को प्रमुख मेरिटाइम सर्विसेज हब बनाने का महत्वपूर्ण अवसर बताया है। सीएसएल के अध्यक्ष जोस वी.जे. के अनुसार यह साझेदारी मरम्मत क्लस्टर को बढ़ावा देगी, अंतरराष्ट्रीय बेड़ों को आकर्षित करेगी और उच्च कौशल वाले रोजगार पैदा करेगी।

आगे की राह

यह समझौता सिर्फ एक सुविधा के संचालन तक सीमित नहीं है। यह भारत के समुद्री क्षेत्र को आधुनिक बनाने, आत्मनिर्भर बनाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। कोच्चि में इस सुविधा का विस्तार होने से देश की समुद्री क्षमता मजबूत होगी और भारत अंतरराष्ट्रीय शिप रिपेयर और मरीन सर्विसेज का भरोसेमंद केंद्र बन सकेगा।

यह साझेदारी दिखाती है कि सरकारी उद्यम और वैश्विक विशेषज्ञता जब साथ आते हैं तो बड़े परिणाम संभव होते हैं। कोच्चि अब सिर्फ शिप बिल्डिंग का केंद्र नहीं, बल्कि शिप रिपेयर का भी मजबूत हब बनने की राह पर है।