RCOM AGM की समयसीमा बढ़ाने के आवेदन पर NCLT की मुंबई पीठ ने Registrar of Companies, Mumbai-II को कार्रवाई का निर्देश दिया है। Reliance Communications Limited ने 24 अक्टूबर 2026 की BSE फाइलिंग में बताया कि आदेश 16 अक्टूबर को पारित हुआ और 23 अक्टूबर को अपलोड किया गया। मामला वित्त वर्ष 2025–26 की वार्षिक आम बैठक से जुड़ा है।

कंपनी ने AGM आयोजित करने के लिए 31 दिसंबर 2026 तक तीन महीने का विस्तार मांगा था। हालांकि, NCLT के आदेश से विस्तार स्वतः मंजूर नहीं हुआ है। इसकी मंजूरी अब भी ROC द्वारा आवेदन पर प्रक्रिया पूरी करने पर निर्भर है।

फाइलिंग के अनुसार, कंपनी की स्थिति MCA V3 पोर्टल पर ‘Under CIRP’ दर्ज होने के कारण Form GNL-1 जमा नहीं हो पा रहा था। पोर्टल सही CIN को भी अमान्य बता रहा था। कंपनी ने 1 सितंबर 2026 को भौतिक आवेदन दिया था, लेकिन उस पर भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी थी।

भौतिक आवेदन या पोर्टल के बैकएंड से प्रक्रिया

NCLT ने कहा कि CIRP में रहने के बावजूद कंपनी को कंपनी कानून और SEBI के नियमों के तहत आवश्यक अनुपालन करना होता है। इस व्यावहारिक बाधा को देखते हुए पीठ ने ये निर्देश दिए:

  • ROC AGM की समयसीमा बढ़ाने वाले भौतिक आवेदन पर प्रक्रिया पूरी करे।
  • भौतिक आवेदन की प्रक्रिया संभव न हो तो उसे MCA प्रणाली के बैकएंड से अपलोड करके निपटाया जाए।
  • यही व्यवस्था DPT-3, MSME-1 और IEPF-5 जैसे अन्य बाधित वैधानिक फॉर्म पर भी लागू होगी।
  • कार्यवाही लंबित रहने के दौरान पोर्टल की बाधा से हुई देरी के लिए कंपनी या Resolution Professional के खिलाफ संबंधित प्रावधानों के तहत दंडात्मक या बलपूर्वक कार्रवाई न की जाए।

पीठ ने MCA से CIRP वाली कंपनियों के AGM और विस्तार आवेदनों में आने वाली पोर्टल संबंधी कठिनाइयों की समीक्षा करने का भी अनुरोध किया।

देरी की वजह और वित्तीय असर

आदेश में दर्ज विवरण के अनुसार, शेयरधारकों के रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने से तैयार वार्षिक रिपोर्ट भेजी नहीं जा सकी। फीस चुकाने और रिकॉर्ड मिलने तक AGM नोटिस भेजने का समय निकल चुका था। AGM की निर्धारित अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 थी।

कंपनी ने स्पष्ट किया कि आदेश में उसके खिलाफ कोई विशिष्ट उल्लंघन निर्धारित नहीं हुआ है। संभावित वित्तीय प्रभाव फिलहाल मापा नहीं जा सकता। Resolution Professional Anish Niranjan Nanavaty का आवेदन स्वीकार कर निस्तारित कर दिया गया है। कंपनी ने आदेश के अनुसार आवश्यक वैधानिक अनुपालन करने की बात कही है।