Ravindra Energy ने 15 अक्टूबर 2026 की BSE फाइलिंग में बताया कि उसकी संयुक्त नियंत्रण वाली इकाई Energy In Motion Limited (EIM) ने पुणे के तलेगांव स्थित अंबी गांव में इलेक्ट्रिक भारी वाणिज्यिक वाहन परिसर खोला है। कंपनी की ओर से साझा प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, परिसर का उद्घाटन 14 अक्टूबर 2026 को हुआ। यहां इलेक्ट्रिक ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रेलर और डंपर जैसे भारी वाहनों की असेंबली की जाएगी।

परिसर की शुरुआती क्षमता प्रति शिफ्ट सालाना 5,000 वाहन है। कंपनी के मुताबिक, यह महाराष्ट्र में EIM के 1,000 करोड़ रुपये के निवेश का पहला चरण है। इस राशि को केवल उद्घाटित परिसर की लागत के रूप में नहीं बताया गया है। MoU पर हस्ताक्षर के बाद परिसर को तैयार करने में एक वर्ष से कुछ अधिक समय लगा।

वाहन और बैटरी असेंबली के साथ परीक्षण सुविधा

Industry 4.0 तकनीक से सुसज्जित इस परिसर में तीन सुविधाएं एक साथ स्थापित की गई हैं:

  • इलेक्ट्रिक भारी वाणिज्यिक वाहनों की असेंबली सुविधा।
  • लिथियम-आयन भारी बैटरी पैक की असेंबली फैक्टरी।
  • स्वतंत्र बैटरी परीक्षण प्रयोगशाला।

EIM के अनुसार, परिसर से 2,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास और IT में भी काम के अवसर मिलने की अपेक्षा है। उद्घाटन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने किया। कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद Sharadchandra Pawar और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री Sunetra Ajit Pawar उपस्थित थीं, जैसा कि विज्ञप्ति में बताया गया है।

हाईवे और बंदरगाहों पर चार्जिंग नेटवर्क की योजना

EIM भारी इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण के साथ प्रमुख राजमार्गों, बंदरगाहों और औद्योगिक परिसरों में देशव्यापी बैटरी स्वैपिंग तथा चार्जिंग ढांचा भी विकसित कर रही है। कंपनी का कहना है कि उसके मेगावाट स्तर के हब EIM और अन्य अनुकूल वाहनों की बैटरी सात मिनट से कम समय में बदल सकते हैं। ये हब DC फास्ट चार्जिंग के BIS मानक वाले CCS-2 सॉकेट से लैस वाहनों को चार्ज भी कर सकते हैं।

तकनीकी साझेदारों में इलेक्ट्रिक भारी वाहनों के लिए BAIC Foton Motor, बैटरी निर्माता CATL और रोबोटिक बैटरी स्वैपिंग प्रणालियों के लिए Shanghai Enneagon Energy Technology शामिल हैं। EIM के प्रबंध निदेशक Narendra Murkumbi ने कहा कि परिसर खुलने के बाद कंपनी अब देशभर में मेगावाट स्तर के चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशनों का नेटवर्क बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इसका उद्देश्य भारी माल परिवहन को डीजल से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर ले जाने में सहायता करना है।