SG Finserve Q2 नतीजे: कंपनी ने 21 अक्टूबर 2026 को BSE में दाखिल अर्निंग्स कॉल ट्रांसक्रिप्ट में बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में उसका कर-पश्चात लाभ (PAT) ₹59 करोड़ के सर्वकालिक तिमाही उच्च स्तर पर पहुंचा। 16 अक्टूबर को हुई कॉल में प्रबंधन ने लोन बुक भी करीब ₹5,700 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर होने की जानकारी दी।

पहली छमाही में कंपनी का कर-पूर्व लाभ ₹150 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि से दोगुना है। इस दौरान ₹16,000 करोड़ से अधिक के ऋण वितरित किए गए। प्रबंधन के अनुसार, वितरण की मात्रा सालाना आधार पर 46% बढ़ी।

कंपनी ने तिमाही के अंत में लगभग ₹1,600 करोड़ की नेटवर्थ बताई। प्रबंधन के मुताबिक, NPA शून्य रहा, परिसंपत्तियों पर प्रतिफल 4.5% से अधिक और लागत-आय अनुपात 15% से नीचे रहा। दूसरी तिमाही में इक्विटी पर प्रतिफल की तिमाही रन-रेट 15% तक पहुंची।

ऊंची ऋण सीमा के साथ कारोबार विस्तार की तैयारी

प्रबंधन ने अपनी ऋण-इक्विटी सीमा 3 गुना से बढ़ाकर 4 गुना करने की जानकारी दी। CEO Vinay Gupta ने कहा कि बोर्ड ने अतिरिक्त उधारी को मंजूरी दी है। चालू वित्त वर्ष में इक्विटी जुटाने के सवाल पर उन्होंने इससे इनकार किया।

Group Chief Strategy Officer Anubhav Gupta के अनुसार, नई सीमा के तहत AUM करीब ₹11,000 करोड़ तक बढ़ाने की गुंजाइश होगी। मौजूदा एंकर ग्राहकों से मिले कारोबार के आधार पर प्रबंधन अगले दो से तीन वर्षों में इस स्तर तक पहुंचने की संभावना देखता है।

Vinay Gupta ने मौजूदा रन-रेट के आधार पर वित्त वर्ष के अंत तक लगभग ₹7,000 करोड़ AUM होने की संभावना जताई। कंपनी ने AUM में 30%-35% और लाभ में 35%-40% चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि का मार्गदर्शन बनाए रखा। ये प्रबंधन के अनुमान हैं।

सप्लाई चेन के साथ डिजिटल ऋण का विस्तार

  • सप्लाई चेन वित्तपोषण का AUM में हिस्सा करीब 70% और समूह के इकोसिस्टम का लोन बुक में हिस्सा 25% रहा।
  • फैक्टरिंग का लोन बुक में योगदान करीब 15% रहा। कंपनी 60 से अधिक ब्रांडों के इकोसिस्टम को वित्तपोषण उपलब्ध करा रही है।
  • तिमाही में डिजिटल माध्यम से करीब 10,000 ऋण दिए गए। संपत्ति के बदले ऋण कारोबार में चार ऋणों का बकाया ₹17 करोड़ रहा।

कंपनी विदेशी सप्लाई चेन कारोबार के लिए GIFT City में पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी स्थापित कर रही है। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि इसके लिए RBI और IFSCA की मंजूरियां आवश्यक हैं और परिचालन शुरू होने में लगभग एक वर्ष लग सकता है।