नई दिल्ली। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने 14 सितंबर 2026 को हुई बैठक में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। कंपनी ने अपने जॉइंट वेंचर NTPC BHEL Power Projects Private Limited (NBPPL) में 65 करोड़ रुपये का और इक्विटी योगदान मंजूर कर दिया है। यह निवेश एक या उससे ज्यादा किस्तों में किया जाएगा।

SEBI (लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स) रेगुलेशन 2015 के रेगुलेशन 30 के तहत BHEL ने स्टॉक एक्सचेंजों को इसकी जानकारी दी है। कंपनी के अनुसार, यह निवेश फेस वैल्यू पर कैश के जरिए होगा और आर्म’स लेंथ बेसिस पर किया जा रहा है। दोनों प्रमोटर्स—BHEL और NTPC—अपना-अपना हिस्सा डालेंगे। BHEL की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत बनी रहेगी।

NBPPL क्या है और क्यों जरूरी है यह निवेश?

NBPPL अप्रैल 2008 में बना 50:50 का जॉइंट वेंचर है। इसका मुख्य मकसद पावर प्लांट्स और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) कॉन्ट्रैक्ट्स पूरा करना है। साथ ही पावर प्लांट इक्विपमेंट का निर्माण और सप्लाई भी भारत व विदेश दोनों जगह करना है।

पिछले कुछ सालों में कंपनी का टर्नओवर काफी घटा है। 2025-26 में प्रोविजनल टर्नओवर सिर्फ 1.04 करोड़ रुपये रहा। इससे पहले 2024-25 में 3.48 करोड़ और 2023-24 में 18.19 करोड़ रुपये था। ऐसे में यह अतिरिक्त पूंजी मुख्य रूप से जरूरी देनदारियों को चुकाने और कंपनी को चलते रहने (going concern) के लिए इस्तेमाल होगी। निवेश वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान पूरा होने की उम्मीद है।

बाजार और कंपनी के लिए क्या मायने रखता है?

BHEL देश की प्रमुख सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी है और पावर सेक्टर में लंबे समय से सक्रिय है। NTPC के साथ यह साझेदारी पहले से चल रही है। दोनों कंपनियां मिलकर NBPPL को मजबूत रखना चाहती हैं ताकि भविष्य में EPC प्रोजेक्ट्स और इक्विपमेंट सप्लाई का काम बेहतर तरीके से हो सके।

यह फैसला इसलिए भी ध्यान देने लायक है क्योंकि हाल के वर्षों में कई PSU कंपनियां अपने जॉइंट वेंचर्स को स्थिर रखने के लिए अतिरिक्त पूंजी डाल रही हैं। BHEL के शेयरधारकों के लिए यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनी अपनी हिस्सेदारी बनाए रखते हुए जॉइंट वेंचर को सपोर्ट कर रही है।

आगे क्या?

BHEL और NTPC दोनों इस निवेश को समय पर पूरा करने की प्रक्रिया में हैं। NBPPL की गतिविधियां पावर प्लांट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी हैं, इसलिए लंबे समय में इससे दोनों कंपनियों को फायदा हो सकता है। फिलहाल कंपनी ने साफ कर दिया है कि कोई खास सरकारी या रेगुलेटरी अप्रूवल की जरूरत नहीं है।

कुल मिलाकर, 14 सितंबर 2026 का यह बोर्ड फैसला BHEL की अपनी सहयोगी कंपनी को मजबूत करने की दिशा में एक ठोस कदम है। निवेशक और पावर सेक्टर से जुड़े लोग आगे की अपडेट्स पर नजर रख सकते हैं।