कोचीन शिपयार्ड और दुबई की ड्राइडॉक्स वर्ल्ड के बीच ऐतिहासिक साझेदारी, कोच्चि में जहाज मरम्मत का नया अध्याय

कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) के निदेशक मंडल ने 9 सितंबर 2026 को एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। कंपनी विलिंगडन द्वीप स्थित अपने अंतरराष्ट्रीय जहाज मरम्मत परिसर (आईएसआरएफ) के लिए दुबई की ड्राइडॉक्स वर्ल्ड-एफजेडसीओ (डीडीडब्ल्यू) के साथ समान भागीदारी वाला संयुक्त उद्यम बनाएगी। यह कदम भारत के जहाज मरम्मत क्षेत्र को वैश्विक मानकों से जोड़ने की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
संयुक्त उद्यम का उद्देश्य और संरचना
नया निजी लिमिटेड कंपनी के रूप में ज्वाइंट वेंचर कोच्चि में पंजीकृत होगा। दोनों कंपनियां 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखेंगी। प्रबंधन के लिए पांच सदस्यीय बोर्ड होगा जिसमें डीडीडब्ल्यू तीन निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, मुख्य वित्तीय अधिकारी तथा मुख्य परिचालन अधिकारी जैसे वरिष्ठ पदों का नामांकन करेगी। सीएसएल दो निदेशक नामित करेगी।
इस सुविधा का उपयोग 130 मीटर से कम लंबाई और 6,000 टन वजन वाले वाणिज्यिक तथा नौसेना जहाजों की सूखी डॉकिंग, रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल के लिए किया जाएगा। साथ ही दस अतिरिक्त वर्कस्टेशन जोड़कर क्षमता बढ़ाने की योजना है।
आईएसआरएफ की वर्तमान स्थिति
यह परिसर लगभग 30 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है, जिसमें भूमि और जल दोनों शामिल हैं। कोचीन पोर्ट अथॉरिटी से 60 वर्ष के पट्टे पर लिया गया यह केंद्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 17 जनवरी 2024 को उद्घाटित किया गया था। व्यावसायिक संचालन 12 अगस्त 2024 से शुरू हुआ।
यहां 6,000 टन क्षमता का शिप लिफ्ट और ट्रांसफर सिस्टम, छह वर्कस्टेशन तथा करीब 1,400 मीटर की बर्थिंग सुविधा उपलब्ध है। एक समय में छह जहाजों की मरम्मत संभव है और सालाना 82 जहाजों तक की क्षमता है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस सुविधा से 207.33 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जो सीएसएल के कुल परिचालन राजस्व का लगभग 4.81 प्रतिशत है। स्वतंत्र मूल्यांकन के अनुसार इसकी कीमत 1,800 करोड़ रुपये आंकी गई है।
लेन-देन की शर्तें
आईएसआरएफ को स्लंप सेल आधार पर ज्वाइंट वेंचर कंपनी को हस्तांतरित किया जाएगा। न्यूनतम 1,800 करोड़ रुपये के प्रतिफल में से आधा नकद और आधा ज्वाइंट वेंचर के शेयरों के रूप में सीएसएल को मिलेगा। दोनों पक्षों के बीच संयुक्त उद्यम समझौता, शेयरधारक समझौता, व्यवसाय हस्तांतरण समझौता और लाइसेंस समझौता अंतिम रूप ले चुके हैं। मुख्य समझौते पर 11 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर होने की संभावना है।
आवश्यक अनुमतियां
प्रस्ताव को लागू करने के लिए कोचीन पोर्ट अथॉरिटी, भारत सरकार (पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय तथा वित्त मंत्रालय के निवेश और सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग) और कंपनी के शेयरधारकों की मंजूरी आवश्यक होगी। सीएसएल इन प्राधिकारियों से संपर्क की प्रक्रिया में है। यह लेन-देन संबंधित पक्ष लेन-देन की श्रेणी में आएगा, इसलिए आवश्यक शेयरधारक अनुमोदन भी लिया जाएगा।
साझेदारी का महत्व
ड्राइडॉक्स वर्ल्ड दुबई दुनिया के प्रमुख जहाज मरम्मत केंद्रों में से एक है। डीपी वर्ल्ड समूह की यह कंपनी चार दशकों से अधिक अनुभव रखती है और हर साल 300 से अधिक परियोजनाएं पूरी करती है। मध्य पूर्व का सबसे बड़ा जहाज मरम्मत परिसर इसके पास है। दोनों कंपनियों की विशेषज्ञता मिलने से भारत में जहाज मरम्मत की गुणवत्ता, दक्षता और टर्नअराउंड समय सुधरने की उम्मीद है।
यह पहल मेरीटाइम इंडिया विजन 2030 और मेरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के लक्ष्यों से मेल खाती है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत समुद्री क्षेत्र में स्वदेशी क्षमता बढ़ाने में भी यह सहायक सिद्ध हो सकती है।
कोचीन शिपयार्ड के इस निर्णय से कोच्चि और केरल के समुद्री उद्योग को नई गति मिलने की संभावना है। आगे की प्रगति पर कंपनी समय-समय पर जानकारी देगी।
