ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीसीआईएल) ने श्री सुसंता कुमार पुरोहित, IRSEE को अतिरिक्त निदेशक (प्रमोटर – नॉन-एग्जीक्यूटिव एवं नॉन-इंडिपेंडेंट) नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 14 सितंबर 2026 से प्रभावी हुई है।

बोर्ड ने सर्कुलेशन द्वारा प्रस्ताव पारित कर इस नियुक्ति को मंजूरी दी थी। शर्त यह थी कि फॉर्म DIR-2 जमा किया जाए। पारादीप पोर्ट अथॉरिटी ने 14 सितंबर 2026 को हस्ताक्षरित फॉर्म DIR-2 भेज दिया, जिसके बाद नियुक्ति उसी दिन से लागू हो गई। श्री पुरोहित अगली वार्षिक आम बैठक (एजीएम) तक या शेयरधारकों की मंजूरी मिलने तक इस पद पर रहेंगे। बाद में नियमित नॉन-एग्जीक्यूटिव निदेशक के रूप में शेयरधारकों की स्वीकृति ली जाएगी।

श्री सुसंता कुमार पुरोहित का संक्षिप्त परिचय

श्री सुसंता कुमार पुरोहित भारतीय रेलवे सर्विस ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स (IRSEE) के 1996 बैच के वरिष्ठ अधिकारी हैं। वे वर्तमान में वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी के चेयरपर्सन हैं। 1 सितंबर 2026 से उन्होंने पारादीप पोर्ट अथॉरिटी (पीपीए) के चेयरमैन का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला है। यह अतिरिक्त प्रभार छह महीने या नए चेयरमैन की नियुक्ति या आगे के आदेश तक के लिए है।

इससे पहले वे भारत सरकार के रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग में संयुक्त सचिव रहे। वहां उन्होंने नीति निर्माण और क्षेत्रीय विकास से जुड़े काम किए। भारतीय रेलवे, बिजली मंत्रालय और ओडिशा सरकार में भी उन्होंने महत्वपूर्ण पदों पर काम किया है। इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, इंजीनियरिंग, प्रशासन और सार्वजनिक क्षेत्र प्रबंधन में उनका लंबा अनुभव है।

पारादीप पोर्ट के लिए महत्व

पारादीप पोर्ट पूर्वी तट का प्रमुख बंदरगाह है। यहां कोयला, आयरन ओर, क्रूड ऑयल समेत बड़े पैमाने पर कार्गो हैंडलिंग होती है। हाल के वर्षों में पोर्ट ने कार्गो हैंडलिंग में नए रिकॉर्ड बनाए हैं। श्री पुरोहित के नेतृत्व में पोर्ट की इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने, कनेक्टिविटी बढ़ाने, कार्गो हैंडलिंग सुविधाओं को आधुनिक बनाने और ग्रीन तथा सस्टेनेबल पोर्ट पहलों पर जोर देने की उम्मीद है।

वे वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी की जिम्मेदारियां भी संभालते रहेंगे। दोनों प्रमुख बंदरगाहों का अनुभव उनके साथ है। इससे डीसीआईएल के बोर्ड में पोर्ट और ड्रेजिंग से जुड़े व्यावहारिक नजरिए का फायदा मिलने की संभावना है।

नियुक्ति क्यों महत्वपूर्ण है?

डीसीआईएल भारत की प्रमुख ड्रेजिंग कंपनी है। बंदरगाहों की गहराई बनाए रखने और नए चैनल बनाने में इसकी भूमिका अहम है। पारादीप जैसे बड़े पोर्ट के चेयरमैन का बोर्ड में शामिल होना कंपनी और बंदरगाह दोनों के लिए तालमेल बढ़ा सकता है। यह कदम भारत के समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने और विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान दे सकता है।

श्री पुरोहित की यह नियुक्ति पोर्ट सेक्टर में अनुभवी अधिकारियों को प्रमुख पीएसयू बोर्डों में लाने की दिशा में एक और कदम है। उनके अनुभव से पारादीप पोर्ट की क्षमता बढ़ाने और डीसीआईएल के कार्यों में रणनीतिक दिशा मिलने की उम्मीद है।