नई दिल्ली : संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज विपक्ष और सरकार के बीच राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के माध्यम से कथित ‘हिंदी’ भाषा थोपे जाने को लेकर एक बार फिर टकराव के साथ शुरू हुआ। नारेबाजी के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

डीएमके सदस्यों ने इस मुद्दे पर सरकार पर हमला किया और इसके सांसद सदन के वेल में चले गए और विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी सांसदों ने नारे लगाए, "हमें न्याय चाहिए।" केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हमले का जवाब दिया और प्रदर्शनकारी सदस्यों पर एनईपी पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाया। प्रधान ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और अन्य डीएमके नेताओं द्वारा लोकसभा में हिंदी थोपे जाने के आरोप को नकार दिया। प्रश्नकाल के दौरान प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति और तीन-भाषा नीति पर यू-टर्न लेने के लिए डीएमके के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार की आलोचना की और उन पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।

उन्होंने उनके रुख को "असभ्य और अलोकतांत्रिक" कहा और दावा किया कि वे तमिलनाडु के छात्रों के भविष्य को नुकसान पहुंचा रहे हैं। प्रधान ने कहा, "वे तमिलनाडु के छात्रों के प्रति प्रतिबद्ध नहीं हैं। वे उनका भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। वे तमिलनाडु के लोगों के साथ बेईमानी कर रहे हैं।" प्रधान ने यह भी बताया कि कर्नाटक, गैर-भाजपा राज्य नहीं होने के बावजूद, कई अन्य गैर-भाजपा राज्यों के साथ नीति को स्वीकार कर चुका है।