एनएचएआई ने जारी किए हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे के नए दिशानिर्देश, विकसित भारत 2047 की राह पर बड़ा कदम
ये दिशानिर्देश भारत सरकार के विकसित भारत 2047 विजन के अनुरूप हैं। इसके तहत 50 हजार किलोमीटर एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे देशभर में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी।

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे की योजना और डिजाइन के लिए व्यापक नए दिशानिर्देश जारी कर दिए हैं। ये दिशानिर्देश एक्सप्रेसवे को छोड़कर आने वाले सभी 4 और 6 लेन ग्रीनफील्ड व ब्राउनफील्ड हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड राष्ट्रीय राजमार्गों पर लागू होंगे। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, इनका मकसद हाई-स्पीड नेशनल हाईवे कॉरिडोर के विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने में एकरूपता लाना, तकनीकी मानकों में स्थिरता बढ़ाना, सड़क सुरक्षा मजबूत करना और पूरे राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क की परिचालन दक्षता सुधारना है।
ये दिशानिर्देश भारत सरकार के विकसित भारत 2047 विजन के अनुरूप हैं। इसके तहत 50 हजार किलोमीटर एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे देशभर में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी।
क्यों जरूरी थे ये नए मानक?
अभी तक एक्सप्रेसवे के अलावा हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे की योजना और डिजाइन के लिए कोई अलग मानक और स्पेसिफिकेशन नहीं थे। अलग-अलग परियोजनाओं में डीपीआर तैयार करते समय मानकों में भिन्नता देखने को मिलती थी। नए दिशानिर्देश इसी कमी को दूर करते हैं। इनमें हाई-स्पीड ट्रैफिक की जरूरतों के हिसाब से अतिरिक्त सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं। खास तौर पर एग्जिट और एंट्री पॉइंट्स की एडवांस सूचना देने का प्रावधान है, जिससे ड्राइवर आसानी से आगे आने वाले एक्सेस और एग्रेस पॉइंट्स का अंदाजा लगा सकें और सुरक्षित तरीके से नेविगेट कर सकें।
लेन कॉन्फिगरेशन और चौड़ाई का नया फॉर्मूला
ट्रैफिक आकलन के आधार पर लेन कॉन्फिगरेशन तय किया जाएगा। मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:
- 15,000 वाहनों तक के ट्रैफिक फ्लो वाले कॉरिडोर में चार-लेन हाईवे और चार-लेन स्ट्रक्चर, कॉरिडोर की चौड़ाई 60 मीटर।
- 15,000 से 25,000 वाहनों वाले कॉरिडोर में चार-लेन हाईवे और छह-लेन स्ट्रक्चर, चौड़ाई 70 मीटर।
- 25,000 से 40,000 वाहनों वाले कॉरिडोर में छह-लेन हाईवे और छह-लेन स्ट्रक्चर, चौड़ाई 70 मीटर।
इससे भविष्य के ट्रैफिक प्रोजेक्शन के हिसाब से सही क्षमता वाली सड़कें बनेंगी।
एक्सेस कंट्रोल और सुरक्षा पर जोर
अनधिकृत एंट्री, अतिक्रमण और आवारा पशुओं के प्रवेश को रोकने के लिए कॉरिडोर के बाहरी किनारे पर एक मीटर ऊंची बाउंड्री वॉल बनाने का प्रावधान किया गया है। यह उपाय हाई-स्पीड कॉरिडोर पर सुरक्षा बढ़ाने में मदद करेगा।
इंटरचेंज रैंप एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और महत्वपूर्ण आर्टेरियल रोड्स के साथ-साथ पोर्ट, एयरपोर्ट, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी), औद्योगिक क्षेत्र और प्रमुख पर्यटन स्थलों से जुड़ने वाली सड़कों पर दिए जाएंगे। इससे बड़े ट्रैफिक जनरेटिंग स्थानों से सीधा और सुरक्षित कनेक्शन सुनिश्चित होगा।
कई रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि इन कॉरिडोर पर मीडियन कट और सरफेस लेवल इंटरसेक्शन नहीं होंगे। फ्लश मीडियन (पेंटेड सेंटर लेन के साथ वायर रोप या क्रैश बैरियर) का इस्तेमाल होगा। एग्जिट साइन 5 किमी, 2 किमी, 1 किमी और 500 मीटर पहले दिए जाएंगे, ताकि ड्राइवर समय रहते लेन बदल सकें।
विकसित भारत 2047 और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी
ये दिशानिर्देश सिर्फ तकनीकी एकरूपता नहीं लाते। ये देश को सुरक्षित, निर्बाध और भविष्य के लिए तैयार राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर से माल और यात्री दोनों की आवाजाही तेज होगी। ट्रकों की औसत गति बढ़ने से लॉजिस्टिक्स लागत कम होने की उम्मीद है, जो अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित होगा।
एनएचएआई का यह प्रयास स्पष्ट करता है कि सड़क सुरक्षा और मानकीकरण अब प्राथमिकता पर है। आने वाले सालों में जब 4 और 6 लेन वाले ये हाई-स्पीड कॉरिडोर तैयार होंगे, तो यात्री अनुभव बेहतर होगा और दुर्घटनाओं के जोखिम में कमी आएगी।
ये दिशानिर्देश 21 सितंबर 2026 को जारी किए गए। इनके लागू होने से पूरे देश में हाई-स्पीड नेशनल हाईवे परियोजनाओं में एक जैसी गुणवत्ता और सुरक्षा मानक सुनिश्चित होंगे। सड़क परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों और आम नागरिकों के लिए यह एक सकारात्मक विकास है।
