Liberty Shoes: प्रमोटर पुनर्वर्गीकरण पर SEBI की सफाई, पहले की चेतावनी बरकरार
Liberty Shoes के प्रमोटर पुनर्वर्गीकरण पर SEBI ने प्रक्रिया स्पष्ट की है। पुरानी चेतावनी बरकरार है और NSE व BSE में NOC के आवेदन अभी विचाराधीन हैं।

Liberty Shoes Ltd ने 8 अक्टूबर 2026 की BSE फाइलिंग में बताया कि SEBI ने दो प्रमोटर शेयरधारकों के पुनर्वर्गीकरण अनुरोधों की प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण दिया है। नियामक के 7 अक्टूबर के पत्र के अनुसार, अब उठाए जाने वाले सुधारात्मक कदम मौजूदा Regulation 31A के तहत पूरे होंगे। हालांकि, 21 जुलाई 2026 को जारी प्रशासनिक चेतावनी बरकरार है और इस स्पष्टीकरण से उस पर कोई असर नहीं पड़ता।
मामला Arpan Gupta की व्यक्तिगत हैसियत में और Dinesh Kumar Gupta HUF के कर्ता के रूप में दी गई अर्जियों से जुड़ा है। दोनों अनुरोध ‘Promoter/Promoter Group’ श्रेणी से ‘Public’ श्रेणी में जाने के लिए हैं। ये अनुरोध 23 मार्च 2024 के हैं। कंपनी ने 26 अगस्त 2026 को SEBI से इन्हें आगे बढ़ाने की प्रक्रिया पर स्पष्टता मांगी थी।
पुराने आचरण और मौजूदा प्रक्रिया के लिए अलग आधार
SEBI ने स्पष्ट किया कि जुलाई के पत्र में दर्ज टिप्पणियां उस समय कंपनी के आचरण से संबंधित हैं, जब अनुरोध प्राप्त हुए और उन पर विचार किया गया। पत्र में पुराने आचरण के आकलन और अब की सुधारात्मक प्रक्रिया के बीच यह अंतर बताया गया है:
- उस समय के आचरण का आकलन Regulation 31A के उस स्वरूप के तहत होगा, जो 13 दिसंबर 2024 से प्रभावी प्रतिस्थापन से पहले लागू था।
- अब आवश्यक सुधारात्मक कदम वर्तमान Regulation 31A के अनुसार उठाए जाएंगे। जुलाई के पत्र में दी गई सलाह भी इसी आधार पर पढ़ी जाएगी।
- SEBI ने संबंधित प्रमोटरों की पुनर्वर्गीकरण पात्रता पर कोई राय नहीं दी है। इसका निर्धारण मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों और उसके बाद शेयरधारकों को लागू प्रावधानों के अनुसार करना है।
NSE और BSE में आवेदनों पर विचार बाकी
Liberty Shoes के अनुसार, जुलाई का पत्र मिलने के बाद उसने जरूरी कदम उठाकर दस्तावेजों और संबंधित तथ्यों सहित NOC के आवेदन जमा कर दिए थे। NSE और BSE में ये आवेदन अभी विचाराधीन हैं।
एक्सचेंजों से NOC मिलने पर कंपनी तय समयसीमा के भीतर पुनर्वर्गीकरण अनुरोध, NOC और निदेशक मंडल के विचार शेयरधारकों की मंजूरी के लिए रखेगी। SEBI ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका पत्र केवल अनुरोधों की प्रक्रिया तक सीमित है। जुलाई के पत्र में उल्लिखित गैर-अनुपालन के संबंध में कानून के अनुसार कार्रवाई की संभावना इस स्पष्टीकरण से प्रभावित नहीं होती।
