DLF बोर्ड ने Madhukar के पुनर्वर्गीकरण को दी मंजूरी, प्रवर्तक हिस्सेदारी 74.08% रहेगी
DLF बोर्ड ने Madhukar को प्रवर्तक समूह से सार्वजनिक श्रेणी में लाने की मंजूरी दी। एक्सचेंजों की मंजूरी बाकी है; प्रवर्तक हिस्सेदारी 74.08% पर बनी रहेगी।

DLF बोर्ड ने 16 अक्टूबर 2026 को Madhukar Housing and Development Company को ‘Promoter/Promoter Group’ से ‘Public’ श्रेणी में पुनर्वर्गीकृत करने के अनुरोध को मंजूरी दी। कंपनी ने उसी दिन BSE को दी गई फाइलिंग में बताया कि यह निर्णय Stakeholders Relationship Committee की सिफारिश पर लिया गया है। पुनर्वर्गीकरण अभी BSE और NSE की मंजूरी के अधीन है।
Madhukar फिलहाल DLF के प्रवर्तक/प्रवर्तक समूह की इकाई है, लेकिन उसके पास कंपनी के कोई इक्विटी शेयर या मतदान अधिकार नहीं हैं। DLF ने इससे पहले 7 अक्टूबर 2026 की सूचना में इस इकाई से सार्वजनिक श्रेणी में स्थानांतरित किए जाने का अनुरोध मिलने की जानकारी दी थी। बोर्ड का ताजा निर्णय उसी अनुरोध पर अगला कदम है।
हिस्सेदारी और परिचालन पर असर नहीं
DLF ने स्पष्ट किया कि इस पुनर्वर्गीकरण से कंपनी के परिचालन पर वित्तीय या किसी अन्य तरह का असर नहीं होगा। मौजूदा शेयरधारिता संरचना, जिसमें सार्वजनिक शेयरधारक भी शामिल हैं, अपरिवर्तित रहेगी। कंपनी के मुताबिक, पुनर्वर्गीकरण के बाद प्रवर्तक/प्रवर्तक समूह के पास 1,83,36,36,385 इक्विटी शेयर बने रहेंगे। यह कंपनी की चुकता इक्विटी शेयर पूंजी का 74.08% है।
बोर्ड ने यह भी दर्ज किया कि Madhukar ने SEBI के Listing Obligations and Disclosure Requirements Regulations, 2015 के Regulation 31A के तहत पुनर्वर्गीकरण की आवश्यक शर्तें पूरी की हैं। फाइलिंग के अनुसार, पुनर्वर्गीकरण को मंजूरी मिलने के बाद भी उसे संबंधित शर्तों का पालन जारी रखना होगा। DLF ने कहा कि वह निर्धारित समयसीमा के भीतर स्टॉक एक्सचेंजों को विस्तृत आवेदन सौंपेगी।
आवेदन और आगे की प्रक्रिया के लिए अधिकार
बोर्ड ने Managing Director Ashok Kumar Tyagi, Group Chief Financial Officer Badal Bagri और Company Secretary R.P. Punjani को अलग-अलग आवश्यक कार्रवाई करने का अधिकार दिया है। इसमें शामिल हैं:
- एक्सचेंजों के लिए आवेदन और संबंधित दस्तावेज अंतिम रूप देकर जमा करना।
- जरूरत के अनुसार सलाहकारों तथा विशेषज्ञों की नियुक्ति और उनका पारिश्रमिक तय करना।
- एक्सचेंजों या संबंधित प्राधिकरणों को स्पष्टीकरण देना और प्रक्रिया संबंधी आवश्यकताएं पूरी करना।
Stakeholders Relationship Committee को भी प्रक्रिया में आने वाली कठिनाइयों का समाधान करने का अधिकार दिया गया है। हालांकि, किसी भी महत्वपूर्ण बदलाव के लिए बोर्ड की पूर्व मंजूरी जरूरी होगी। 16 अक्टूबर की बोर्ड बैठक दोपहर 2 बजे शुरू हुई और 3:45 बजे समाप्त हुई।
