Chandra Bhagat Pharma वारंट इश्यू: 66 लाख वारंट के लिए BSE की सैद्धांतिक मंजूरी
Chandra Bhagat Pharma को 66 लाख परिवर्तनीय वारंट के तरजीही इश्यू पर BSE की सैद्धांतिक मंजूरी मिली है। न्यूनतम निर्गम मूल्य 44 रुपये है; लिस्टिंग मंजूरी अलग

Chandra Bhagat Pharma वारंट इश्यू को BSE की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। कंपनी ने 13 अक्टूबर, 2026 को BSE में दाखिल सूचना में बताया कि एक्सचेंज ने 66 लाख परिवर्तनीय वारंट के तरजीही निर्गम के लिए मंजूरी दी है। BSE का मंजूरी पत्र 12 अक्टूबर, 2026 का है। ये वारंट प्रमोटरों और गैर-प्रमोटरों को जारी किए जाने हैं।
प्रस्तावित वारंट 66 लाख इक्विटी शेयरों में परिवर्तनीय होंगे। प्रत्येक इक्विटी शेयर का अंकित मूल्य 10 रुपये है और निर्गम मूल्य 44 रुपये प्रति वारंट से कम नहीं होगा। कंपनी ने यह जानकारी SEBI के LODR नियमों के रेगुलेशन 30 के तहत दी है। उसका BSE स्क्रिप कोड 542934 है।
फाइलिंग के साथ संलग्न पत्र में BSE ने LODR के रेगुलेशन 28(1) के तहत मंजूरी दी है। कंपनी की ओर से दाखिल सूचना पर प्रबंध निदेशक Hemant Chandravadan Bhagat के हस्ताक्षर हैं।
लिस्टिंग के लिए अलग प्रक्रिया जरूरी
BSE ने स्पष्ट किया है कि सैद्धांतिक मंजूरी को लिस्टिंग की मंजूरी नहीं माना जाएगा। कंपनी को प्रतिभूतियों की लिस्टिंग संबंधी आवश्यकताओं का अलग से पालन करना होगा। निर्गम और आवंटन के लिए लागू कानूनों, SEBI के ICDR तथा LODR नियमों और लिस्टिंग समझौते का अनुपालन भी जरूरी है। अन्य आवश्यक वैधानिक मंजूरियां लेने की जिम्मेदारी कंपनी की होगी।
प्रस्तावित आवंटियों के कारोबार की निगरानी के संबंध में एक्सचेंज ने ये निर्देश दिए हैं:
- आवंटन से पहले आंतरिक नियंत्रण मजबूत किए जाएं, ताकि प्रस्तावित आवंटियों के सौदों से ICDR नियमों का उल्लंघन न हो।
- आवंटियों से यह लिखित आश्वासन लिया जाए कि वे आवंटन की तारीख तक कंपनी के शेयरों में इंट्रा-डे कारोबार या बिक्री नहीं करेंगे।
- इन शर्तों और लागू प्रावधानों के अनुपालन की जांच का दायित्व जारीकर्ता कंपनी पर रहेगा।
आवंटन के बाद आवेदन की समयसीमा
एक्सचेंज ने प्रतिभूतियों के आवंटन के बाद लागू शुल्क और दस्तावेजों के साथ बिना देरी लिस्टिंग आवेदन करने को कहा है। पत्र के मुताबिक, आवेदन आवंटन से 20 दिनों के भीतर देना होगा। इस आवश्यकता का पालन नहीं होने पर संबंधित SEBI परिपत्र के अनुसार जुर्माना लगेगा।
BSE ने यह भी कहा कि आवंटियों के कारोबार में अनुपालन की कमी बाद में सामने आने पर शेयरों की लिस्टिंग प्रभावित हो सकती है। एक्सचेंज को दी गई जानकारी अधूरी, गलत, भ्रामक या असत्य पाए जाने अथवा लागू नियमों के उल्लंघन की स्थिति में वह किसी भी चरण पर सैद्धांतिक मंजूरी वापस ले सकता है।
