एचसीएल की कॉपर माइन्स को चार वर्षों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा पुरस्कार (खान) से किया गया सम्मानित
<p> <big><span [removed] 14.4px;">हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की कॉपर माइन्स को वर्ष 2020, 2019, 2018 और 2017 के लिए माननीय श्रम एवं रोजगार मंत्री श्री भूपेंद्र यादव द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा पुरस्कार (खान) से सम्मानित किया गया है।</span></big></p>

NEW DELHI-हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड की कॉपर माइन्स को वर्ष 2020, 2019, 2018 और 2017 के लिए माननीय श्रम एवं रोजगार मंत्री श्री भूपेंद्र यादव द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा पुरस्कार (खान) से सम्मानित किया गया है।
एचसीएल ने एलएएफपी (सबसे लंबे समय तक दुर्घटना मुक्त अवधि) और एलआईएफआरएम (प्रति लाख मैनशिफ्ट पर सबसे लंबी चोट की आवृत्ति दर) की श्रेणियों में पुरुस्कार प्राप्त किए है।
हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड द्वारा प्राप्त करने वाले पुरुस्कार है-
1) मलंजखंड कॉपर माइन (एलएएफपी-टाइप-4): रनर, 2020
2) खेतड़ी कॉपर माइन (एलएएफपी-टाइप-6): रनर, 2019
3) खेतड़ी कॉपर माइन (एलआईएफआरएम-टाइप-6): विजेता, 2018
4) कोलिहान कॉपर माइन (एलआईएफआरएम-टाइप-6): रनर, 2018
5) कोलिहान कॉपर माइन (एलआईएफआरएम-टाइप-6): विजेता, 2017
श्री संजय पंजियार, निदेशक (संचालन), एचसीएल, श्री श्री कुमार, कार्यकारी निदेशक, केसीसी, खान प्रबंधक और एचसीएल के अन्य अधिकारियों ने पुरस्कार प्राप्त किए।
हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) खान मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन एक सार्वजनिक उपक्रम की स्थापना 9 नवम्बर 1967 को की गई थी। इसे देश की एकमात्र उर्ध्वाकार एकीकृत तांबा उत्पादक कंपनी होने का गौरव प्राप्त है क्योंकि यह खनन के चरण से लेकर बेनिफीशिएशन, प्रग्गदलन, शोधन और परिष्कृत तांबे की धातु को डाउनस्ट्रीम बिक्री योग्य उत्पादों में ढालने के लिए तांबे का निर्माण करती है।
एचसीएल-
कंपनी के पास कॉपर कॉन्संट्रेट, कॉपर कैथोड, कंटीन्यूअस कास्ट कॉपर रॉड और एनोड स्लाइम (जिसमें सोना, चांदी आदि शामिल है), कॉपर सल्फेट और सल्फ्यूरिक एसिड जैसे उप-उत्पादों के उत्पादन और विपणन की सुविधाएं हैं।
वर्तमान में, कंपनी खनन और लाभकारी संचालन पर ध्यान केंद्रित कर रही है और मुख्य रूप से मुख्य उत्पाद के रूप में ताम्र कंसंन्ट्रेट बेच रही है।
समाप्त वित्तीय वर्ष 2020-21 में, कंपनी ने 1760.84 करोड़ रुपये (जीएसटी को छोड़कर) के बिक्री कारोबार के मुकाबले 109.98 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ (पीएटी) अर्जित किया है।
एचसीएल की खदानें और संयंत्र पांच परिचालन इकाइयों में फैले हुए हैं, जिसमें राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, महाराष्ट्र और गुजरात प्रत्येभक राज्य में एक-एक है।
