PFC-REC विलय: BSE और NSE से अनापत्ति पत्र मिले, RBI मंजूरी की शर्त बाकी
PFC को REC के प्रस्तावित विलय पर BSE और NSE से अनापत्ति पत्र मिले हैं। NSE पत्र की प्रभावशीलता RBI की मंजूरी और बकाया dues के निपटान की शर्तों पर निर्भर है।

PFC-REC विलय के प्रस्ताव पर Power Finance Corporation Ltd ने 19 अक्टूबर 2026 की BSE फाइलिंग में बताया कि उसे BSE और NSE से अनापत्ति पत्र मिल गए हैं। दोनों पत्र उसी दिन प्राप्त हुए। प्रस्तावित योजना के तहत REC Limited का Power Finance Corporation Limited में विलय होना है। हालांकि, योजना लागू होने के लिए अन्य आवश्यक मंजूरियां और निर्धारित शर्तें पूरी करना बाकी है।
कंपनी ने इससे पहले 28 जून 2026 के पत्र में दोनों कंपनियों के निदेशक मंडलों द्वारा योजना को मंजूरी दिए जाने की सूचना दी थी। बोर्ड की मंजूरी लागू नियामकीय और अन्य स्वीकृतियों के अधीन थी। यह योजना कंपनी अधिनियम, 2013 की धाराओं 230-232 और अन्य लागू प्रावधानों के तहत दोनों कंपनियों तथा उनके शेयरधारकों और लेनदारों से संबंधित है।
RBI मंजूरी और बकाया निपटान की शर्त
NSE के संलग्न अवलोकन पत्र के अनुसार, RBI की मंजूरी अभी लंबित है और योजना में शामिल एक सूचीबद्ध इकाई का बकाया भी है। पत्र की प्रभावशीलता आवश्यक RBI मंजूरी मिलने और संबंधित बकाये के निपटान पर निर्भर है। उपलब्ध अंश में बकाये की रकम या संबंधित इकाई का नाम नहीं दिया गया है।
NSE ने NCLT के समक्ष मसौदा योजना दाखिल करने के लिए अनापत्ति दी है। अवलोकन पत्र 19 अक्टूबर 2026 से छह महीने तक वैध है और इसी अवधि में योजना NCLT को प्रस्तुत करनी होगी। योजना पर संबंधित शेयरधारकों और लेनदारों की आवश्यक मंजूरियों सहित अन्य वैधानिक शर्तें भी लागू रहेंगी।
पत्र स्पष्ट करता है कि दस्तावेज जमा करने को NSE या SEBI द्वारा योजना की मंजूरी नहीं माना जाना चाहिए।
शेयरधारकों को किन विवरणों का खुलासा होगा
अवलोकन पत्र में कंपनियों को शेयरधारकों से मंजूरी मांगते समय विस्तृत जानकारी देने को कहा गया है। इसमें शामिल हैं:
- विलय की जरूरत, उसका तर्क, लागत-लाभ विश्लेषण तथा संभावित लाभ और जोखिम।
- शेयर स्वैप अनुपात का आधार, मूल्यांकन के तरीके और निष्पक्षता राय देने वाले मर्चेंट बैंकर का विवरण।
- पिछले तीन वर्षों के वित्तीय आंकड़े, हस्तांतरित होने वाली संपत्तियां व देनदारियां और विलय के बाद की बैलेंस शीट।
- लंबित मंजूरियां तथा लागू होने पर कंपनियों और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध लंबित कार्रवाइयों का विवरण।
सरकार को अतिरिक्त प्रतिभूतियां जारी करने के कारण शेयर विनिमय अनुपात सहित संबंधित शर्तों में बदलाव होने पर एक्सचेंजों और SEBI की मंजूरी जरूरी होगी। योजना के तहत जारी होने वाले इक्विटी शेयर केवल डीमैट रूप में होंगे।
