Yes Bank AT1 बॉन्ड के ₹8,415 करोड़ के राइट-डाउन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बैंक, Reserve Bank of India और केंद्र सरकार की अपीलें खारिज कर दी हैं। Yes Bank ने 16 अक्टूबर 2026 की BSE फाइलिंग में बताया कि अदालत ने 15 अक्टूबर 2026 को फैसला सुनाते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश बरकरार रखा।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने 20 जनवरी 2023 के अपने फैसले में AT1 बॉन्ड को राइट-डाउन करने का प्रशासक का आदेश रद्द किया था। ₹8,415 करोड़ के इन बॉन्ड का राइट-डाउन मार्च 2020 में बैंक के पुनर्गठन के दौरान किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बैंक आदेश और उसके प्रभावों की विस्तृत समीक्षा कर रहा है।

कूपन भुगतान और लंबित मामलों पर अदालत का निर्देश

फाइलिंग के साथ दिए गए फैसले के विवरण में अपीलों को खारिज करने के अलावा कूपन भुगतान और अन्य कार्यवाहियों पर भी निर्देश शामिल हैं:

  • मामले में कोई अंतरिम आदेश लागू था तो वह भी समाप्त हो गया है।
  • वार्षिक कूपन का भुगतान इन अपीलों के परिणाम से अप्रभावित रहेगा और संबंधित सूचना ज्ञापनों की शर्तों के अनुसार करना होगा।
  • सभी पक्ष अपना मुकदमे का खर्च स्वयं वहन करेंगे।
  • लंबित कार्यवाहियां इस फैसले से प्रभावित हुए बिना अपने तार्किक निष्कर्ष तक पहुंच सकती हैं।

बैंक ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करता है। वह उपलब्ध सभी कानूनी विकल्पों और आगे उठाए जाने वाले उपयुक्त कदमों का मूल्यांकन भी कर रहा है।

CET1 पर करीब 250 आधार अंकों के असर का अनुमान

पूंजी पर्याप्तता के संबंध में बैंक ने बताया कि AT1 बॉन्ड की मूल राशि बहाल किए जाने पर 30 जून 2026 की स्थिति के अनुसार, लाभ सहित CET1 अनुपात पर प्रोफॉर्मा प्रभाव करीब 250 आधार अंक रहने का अनुमान है। वहीं, प्रोफॉर्मा आधार पर Tier1 अनुपात 14.0% पर अप्रभावित रहने की बात कही गई है। ये आंकड़े मूल राशि की बहाली के अनुमानित प्रभाव को दर्शाते हैं।

बैंक के अनुसार, उसके पास पूंजी प्रबंधन के उपयुक्त विकल्प उपलब्ध हैं और वह अपने विकास उद्देश्यों के लिए जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पूंजी संबंधी कदम उठा सकता है। आदेश के वित्तीय, परिचालन और अन्य प्रभावों की समीक्षा जारी है। बैंक ने कहा कि वह इस संबंध में आगे उपयुक्त खुलासे करेगा।