माइक्रोसॉफ्ट ने हैदराबाद में लॉन्च किया चौथा क्लाउड रीजन, भारत में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़ा दांव
यह लॉन्च कंपनी की पहले से घोषित 20.5 अरब डॉलर की निवेश योजना का हिस्सा है। इस निवेश का मकसद भारत में क्लाउड क्षमता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल डेवलपमेंट और ऑपरेशनल विस्तार को मजबूत करना है।

माइक्रोसॉफ्ट ने सोमवार को हैदराबाद में अपना चौथा क्लाउड रीजन लॉन्च कर दिया है। इस नए ‘इंडिया साउथ सेंट्रल’ क्लाउड रीजन के साथ कंपनी अब पुणे, चेन्नई और मुंबई के बाद हैदराबाद में भी अपना हाइपरस्केल क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर चला रही है। यह भारत में माइक्रोसॉफ्ट का सबसे बड़ा क्लाउड फुटप्रिंट बन गया है।
यह लॉन्च कंपनी की पहले से घोषित 20.5 अरब डॉलर की निवेश योजना का हिस्सा है। इस निवेश का मकसद भारत में क्लाउड क्षमता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर, स्किल डेवलपमेंट और ऑपरेशनल विस्तार को मजबूत करना है।
माइक्रोसॉफ्ट इंडिया एंड साउथ एशिया के प्रेसिडेंट पुनीत चंदोक ने लॉन्च के दौरान कहा कि भारत डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है। उन्होंने बताया कि भारत दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत डेटा का उत्पादन करता है, लेकिन वैश्विक डेटा सेंटर क्षमता में इसकी हिस्सेदारी महज 3 प्रतिशत के आसपास है। यही अंतर देश के लिए बड़ा अवसर भी पैदा कर रहा है।
वर्तमान में भारत की डेटा सेंटर क्षमता करीब 2 गीगावॉट है। विशेषज्ञों के अनुसार 2035 तक यह क्षमता 12 से 14 गीगावॉट तक पहुंच सकती है। चंदोक के मुताबिक कंपनियां, सरकारी विभाग और संस्थाएं अब एआई के प्रयोग से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर एआई एप्लिकेशन लगा रही हैं। ऐसे में विश्वसनीय और लोकल डेटा रेसिडेंसी वाली क्लाउड क्षमता की जरूरत तेजी से बढ़ रही है।
हैदराबाद का नया रीजन तीन अवेलेबिलिटी जोन के साथ तैयार किया गया है। यह मिशन-क्रिटिकल और एआई वर्कलोड को सपोर्ट करने के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी का दावा है कि यहां कूलिंग के लिए पानी का इस्तेमाल लगभग शून्य रखा गया है। एयर-कूल्ड सिस्टम के साथ रिनेबल एनर्जी और ग्राउंडवाटर रिचार्ज जैसे उपाय भी शामिल किए गए हैं।
माइक्रोसॉफ्ट ने बताया कि आदानी ग्रुप, बजाज फिनसर्व, एचडीएफसी बैंक और पीबी पे जैसी कंपनियां पहले ही इस नए रीजन पर काम शुरू कर चुकी हैं। आगे चलकर यहां एज़्योर और एआई सर्विसेज का पूरा पोर्टफोलियो उपलब्ध होगा, जिसमें माइक्रोसॉफ्ट फाउंड्री भी शामिल है।
कंपनी इस रीजन को सिर्फ भारत के लिए नहीं बल्कि एशिया और ग्लोबल साउथ के लिए भी स्ट्रैटेजिक हब के रूप में देख रही है। इससे भारतीय संगठनों को लोकल डेटा रेसिडेंसी, बेहतर रेजिलिएंस और अधिक विकल्प मिलेंगे।
भारत में डेटा सेंटर बिल्डआउट से 2030 तक 140 से 200 अरब डॉलर का आर्थिक प्रभाव पड़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। माइक्रोसॉफ्ट का यह कदम इसी बड़े बदलाव का हिस्सा है, जहां देश डेटा पैदा करने वाले देश से डेटा प्रोसेसिंग और एआई क्षमता वाले हब की ओर बढ़ रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह लॉन्च?
- भारत में एंटरप्राइज एआई अपनाने की रफ्तार तेज हो रही है।
- डेटा सॉवरेनटी और रेगुलेटरी जरूरतों को पूरा करने के लिए लोकल क्लाउड रीजन जरूरी हो गए हैं।
- सस्टेनेबल कूलिंग और ग्रीन एनर्जी पर फोकस भविष्य के डेटा सेंटर मॉडल को आकार दे रहा है।
- स्किलिंग के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से नौकरियां और इनोवेशन दोनों बढ़ने की उम्मीद है।
माइक्रोसॉफ्ट का यह नया क्लाउड रीजन भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाला कदम साबित हो सकता है। जैसे-जैसे कंपनियां एआई को मुख्यधारा में लाएंगी, हैदराबाद जैसे हब की भूमिका और महत्वपूर्ण होती जाएगी।
