भारतीय नौसेना की बढ़ी ताकत, भारत ने लॉन्च की चौथी परमाणु पनडुब्बी, जानिए क्या है इसकी खासियत
इस साल दिसंबर में चालू होने वाली कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी, आईएनएस वाग्शीर, के साथ पारंपरिक पनडुब्बियों की क्षमताओं को भी बढ़ाया गया है।

नई दिल्ली: भारत ने अपने विरोधियों के खिलाफ परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए विशाखापत्तनम स्थित शिप बिल्डिंग सेंटर (एसबीसी) में अपनी चौथी परमाणु संचालित बैलिस्टिक मिसाइल (एसएसबीएन) पनडुब्बी का शुभारंभ किया है। इसे 16 अक्टूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लॉन्च किया। इस पनडुब्बी के 75% हिस्से का निर्माण भारत में ही किया गया है। इसका कोड नाम S4 है, और यह 3500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली न्यूक्लियर बैलिस्टिक मिसाइल से लैस है।
नौसेना की S4 पनडुब्बी 3,500 किमी रेंज वाली K-4 परमाणु बैलिस्टिक मिसाइलों से लैस है, जिन्हें वर्टिकल लॉन्चिंग सिस्टम के जरिए दागा जा सकता है। इसके विपरीत, अपनी श्रेणी की पहली पनडुब्बी, आईएनएस अरिहंत, 750 किमी रेंज वाली K-15 परमाणु मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है। आईएनएस अरिहंत और आईएनएस अरिघाट दोनों पहले से ही गहरे समुद्र में गश्त कर रही हैं।
आईएनएस अरिदमन को S4 नाम दिया गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा योजनाकारों ने भारत की पहली परमाणु पनडुब्बी, आईएनएस चक्र, को एस1 नाम दिया था, जबकि आईएनएस अरिहंत को एस2, आईएनएस अरिघाट को एस3 और आईएनएस अरिदमन को एस4 नाम दिया गया है। S4 अपनी श्रेणी की आखिरी पनडुब्बी है, जिसका औपचारिक नाम अभी घोषित होना बाकी है।
चीन जैसे शक्तिशाली विरोधियों के खिलाफ इस पनडुब्बी पर केंद्र सरकार विशेष ध्यान दे रही है। यही कारण है कि सरकार ने भारतीय नौसेना के लिए तीसरे विमानवाहक पोत की तुलना में परमाणु हमले और बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों को प्राथमिकता दी है। इस साल दिसंबर में चालू होने वाली कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी, आईएनएस वाग्शीर, के साथ पारंपरिक पनडुब्बियों की क्षमताओं को भी बढ़ाया गया है।
