हिमाचल बजट: कर्ज के दम पर मतदाताओं को रिझाने का किया गया प्रयास
<p> प्रदेश के इतिहास में अभी तक भी किसी की भी सरकार के लगातार दोबारा सरकार बनाने के लिए जयराम ने इस बजट के जरिये नया इतिहास रचने की रणनीति तैयार की है।</p>

- आमदनी और खर्च की को खत्म करने की मंशा नदारद, ऋण लेकर बेड़ा पार करने की परंपरा को किया गया फॉलो
- बजट में आगामी चुनाव को फोकस कर दोबारा सरकार बनाने के इतिहास को रखने का प्रयास
शिमला : करोड़ो के कर्ज को दरकिनार कर मांग कर घी पीने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए जयराम सरकार ने कोरोना काल में माइनस छह फीसदी तक गिरी प्रदेश की विकास दर की सच्चाई को भी किनारे कर अपने चौथे बजट में चुनाव को फोकस कर मतदाताओं का रिझाने का प्रयास किया है। प्रदेश के इतिहास में अभी तक भी किसी की भी सरकार के लगातार दोबारा सरकार बनाने के लिए जयराम ने इस बजट के जरिये नया इतिहास रचने की रणनीति तैयार की है।
व्यावहारिक सोच से परे रखकर बनाया गया बजट
हालांकि 2022 के चुनावी वर्ष से पहले करीब 45 हजार नौकरियों को एक वर्ष में देने सहित कई घोषणाओं को पूरा करना व भारी वित्तीय संकट के बीच धन का प्रबंध करना प्रदेश सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होगा।
वर्ष 2020-21 के बजट से इस बजट की तुलना करें तो राजस्व प्राप्ति जहां 1411 करोड़ घट रही है, वहीं कुल बजट 1061 करोड़ ही बढ़ा है। हालांकि राजस्व व्यय भी 632 करोड़ रुपये घटेगा। पिछले वर्ष जहां राजस्व घाटा 684 करोड़ रुपये रखा गया था, वहीं इस बार यह 1463 करोड़ होगा। राजस्व घाटा गत वर्ष की तुलना में 779 करोड़ बढ़ जाना चिंता का विषय माना जा रहा है, हालांकि इसमें अप्रैल 2020 से शुरू हुआ कोरोना काल जिम्मेदार है।इस बजट को देखने पर पता चलता है कि प्रति 100 रुपये का 56.06 रुपये वेतन, पेंशन, ब्याज व ऋ ण अदायगी पर ही खर्च होगा जबकि 43.94 रुपये विकास कार्यों सहित अन्य गतिविधियों पर खर्च होंगे। खास बात यह है कि इसमें 16.64 रुपये तो ऋण व ब्याज अदायगी पर ही खर्च होंगे।
संभावनाओं के दम पर बजट की नीव
30 हजार सरकारी सहित 45 हजार नौकरियां, लाखों मानदेय कर्मियों के मानदेय में बढ़ोतरी व हर आय वर्ग की बुजुर्ग महिला की पेंशन शुरू करने की घोषणा, महिलाओं व युवाओं के लिए दर्जनों घोषणाएं उधार से काम चलाने वाली सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित होंगे। जाहिर है कि इस बजट की घोषणाओं पर विपक्ष का मंथन भी जारी रहेगा। इन घोषणाओं को आगामी वर्ष में चुनावी मुद्दा बनाने की विपक्ष कोशिश करेगा।
पिछले वर्ष के बजट की तुलना इस वर्ष का बजट ज्यादा कर्ज पर निर्भर
वर्ष 2020-21 के बजट से इस बजट की तुलना करें तो राजस्व प्राप्ति जहां 1411 करोड़ घट रही है, वहीं कुल बजट 1061 करोड़ ही बढ़ा है। हालांकि राजस्व व्यय भी 632 करोड़ रुपये घटेगा। पिछले वर्ष जहां राजस्व घाटा 684 करोड़ रुपये रखा गया था, वहीं इस बार यह 1463 करोड़ होगा। राजस्व घाटा गत वर्ष की तुलना में 779 करोड़ बढ़ जाना चिंता का विषय माना जा रहा है, हालांकि इसमें अप्रैल 2020 से शुरू हुआ कोरोना काल जिम्मेदार है।
ऐसे में जाहिर है कि सरकार को इस वर्ष ज्यादा ऋ ण या केंद्र की सहायता पर निर्भर रहना होगा। माना जा रहा है कि करीब 7000 करोड़ से अधिक की सहायता राशि का जुगाड़ सरकार को करना होगा। सरकार ने चुनावों को ध्यान में रखते हुए कोई नया टैक्स लगाने या टैक्स बढ़ाने का भी कोई जोखिम नहीं लिया है।
राजनीतिक मंशा के तहत तैयार किया गया बजट
राजनीतिक जानकारों की मानें तो आगामी वर्ष 2022-23 का बजट पेश होने के छह माह बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव हो जाने हैं, जबकि चार जिलों में नगर निगम के चुनाव अगले माह होने हैं। ऐसे में इस बजट से ही अधिकांश लोकलुभावन घोषणाएं कर मतदाताओं को रिझाना जरूरी था। हालांकि माना जा रहा है कि अनुबंध कर्मियों का कार्यकाल दो से तीन साल करने व भूमि अधिग्रहण में फैक्टर दो लागू करने की घोषणाएं संभवत: आगामी बजट के लिए रख ली गई है।
दोबारा सरकार बनाने के इतिहास को रचने का दमदार प्रयास
दरअसल, कोई भी सरकार प्रदेश में लगातार दोबारा आने पर एक इतिहास रचा जाएगा। कांग्रेस से भले ही वीरभद्र सिंह प्रदेश में छह बार मुख्यमंत्री रहे हों लेकिन वह लोकप्रिय मुख्यमंत्री होते हुए भी कभी अपनी सरकार रिपीट नहीं करा सके। जयराम की कोशिश होगी कि सरकार रिपीट कर अपनी लकीर प्रदेश की सियासत में बड़ी करने के साथ ही इतिहास रचे।
(Anjul Tyagi)
