बता दे कि हाईकोर्ट में गोरखपुर में पूरे जिले में अनुसूचित जनजाति का एक भी व्यक्ति न होने के बावजूद ग्राम प्रधान की सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित करने के खिलाफ याचिका दाखिल की गई थी। इस पर न्यायालय ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति एम सी त्रिपाठी और न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशरी की खंडपीठ ने गोरखपुर के परमात्मा नायक और दो अन्य की याचिका पर दिया है। मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर विशेष न्यायालय की बेंच बैठी और शुक्रवार दो अप्रैल को अवकाश के दिन याचिका की सुनवाई हुई।

इसके बावजूद सरकार ने 26 मार्च 21 को जारी आरक्षण सूची मे चवारियां बुजुर्ग, चवरियां खुर्द व महावर कोल ग्राम सभा सीट को आरक्षित घोषित कर दिया। उपबंधो का यह खुला उल्लंघन है और आरक्षण के रिकार्ड तलब कर इसे रद्द किया जाए और चुनावियों को चुनाव लडऩे की छूट दी जाए। मुख्य स्थायी अधिवक्ता की याचिका की पोषणीयता पर आपत्ति को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।

(Anjul Tyagi)