Pritika Auto Industries: Pritika Auto: हाई कोर्ट ने बजटरी सपोर्ट रिफंड खारिज करने का आदेश रद्द किया
Pritika Auto की रिफंड याचिका हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्वीकार की। कंपनी की BSE फाइलिंग में आदेश का ब्योरा है, लेकिन रिफंड राशि या भुगतान की जानकारी नहीं है।

Pritika Auto Industries Ltd ने 8 अक्टूबर, 2026 को BSE में दाखिल सूचना में बताया कि हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने उसकी रिट याचिका स्वीकार कर ली है। अदालत ने 7 अक्टूबर, 2026 के फैसले में बजटरी सपोर्ट योजना के तहत कंपनी की रिफंड मांग खारिज करने वाला आदेश रद्द कर दिया। यह आदेश हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित GST डिवीजन के डिप्टी कमिश्नर ने दिया था।
विवाद 3 फरवरी, 2025 के आदेश से जुड़ा था, जिसके जरिए कंपनी की रिफंड मांग अस्वीकार की गई थी। Pritika Auto Industries Ltd ने इसके खिलाफ 19 अप्रैल, 2025 को हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में रिट याचिका दाखिल की थी। कंपनी ने उसी दिन शेयर बाजारों को इस कानूनी कार्यवाही की जानकारी दी थी।
कंपनी को 8 अक्टूबर को मिली आदेश की प्रति
कंपनी के मुताबिक, उसे अदालत के 7 अक्टूबर के आदेश की प्रति 8 अक्टूबर, 2026 को सुबह 10:11 बजे भारतीय समयानुसार प्राप्त हुई। इसके बाद उसने पहले दी गई सूचना के संदर्भ में मुकदमे की ताजा स्थिति एक्सचेंजों को बताई।
यह खुलासा SEBI के लिस्टिंग दायित्व और प्रकटीकरण आवश्यकताओं से संबंधित नियमों के Regulation 30 के तहत किया गया है। कंपनी ने सूचना के साथ संलग्न Annexure I में भी स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए विवादित आदेश को निरस्त कर दिया है।
पत्र BSE और National Stock Exchange of India, दोनों को संबोधित है। इसमें कंपनी का BSE सिक्रिप कोड 539359 और NSE सिंबल PRITIKAUTO दिया गया है। सूचना पर कंपनी सचिव एवं अनुपालन अधिकारी C B Gupta के हस्ताक्षर हैं।
रिफंड राशि और भुगतान का ब्योरा नहीं
फाइलिंग में रिफंड की रकम, उसके भुगतान की समयसीमा या कंपनी की वित्तीय स्थिति पर किसी निर्धारित प्रभाव का उल्लेख नहीं है। उपलब्ध सूचना अदालत द्वारा याचिका स्वीकार किए जाने और रिफंड मांग खारिज करने वाला आदेश रद्द किए जाने की पुष्टि करती है; इसमें रिफंड का भुगतान मिलने की जानकारी नहीं दी गई है।
Annexure I में कंपनी ने प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों, प्रमोटर या अंतिम नियंत्रण रखने वाले व्यक्ति के खिलाफ मुकदमे से संबंधित मद को लागू नहीं बताया है। इसी तरह, समझौते की शर्तों, मुआवजे या जुर्माने तथा समझौते के वित्तीय प्रभाव से संबंधित मद भी लागू नहीं बताया गया है।
