PFS ने Rajiv Malhotra का MD & CEO कार्यकाल एक साल बढ़ाया, शेयरधारकों की मंजूरी बाकी
PFS बोर्ड ने Rajiv Malhotra का अतिरिक्त प्रभार वाला कार्यकाल नवंबर 2027 तक बढ़ाया। शेयरधारकों की मंजूरी बाकी है; निवेश मौद्रीकरण के लिए नोडल अधिकारी भी नियुक्त

PTC India Financial Services Ltd (PFS) के बोर्ड ने 12 अक्टूबर 2026 को Rajiv Malhotra का MD & CEO (अतिरिक्त प्रभार) के रूप में कार्यकाल एक साल बढ़ाने की मंजूरी दी। कंपनी की BSE फाइलिंग के अनुसार, यह विस्तार 1 दिसंबर 2026 से 30 नवंबर 2027 तक समान नियमों और शर्तों पर होगा तथा इसके लिए शेयरधारकों की मंजूरी आवश्यक है।
बोर्ड ने नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति की सिफारिश पर यह निर्णय लिया। Malhotra का मौजूदा कार्यकाल 1 जुलाई 2026 से 30 नवंबर 2026 तक है। कंपनी ने बताया कि शेयरधारकों से मंजूरी लेने के लिए पोस्टल बैलट की प्रक्रिया, समयसीमा और अन्य विवरण उसके नोटिस के साथ बाद में जारी किए जाएंगे।
फाइलिंग के मुताबिक, Malhotra को SEBI या किसी अन्य प्राधिकरण के आदेश से निदेशक पद संभालने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है। उन्हें उपयोगिता और ऊर्जा क्षेत्र में 36 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह NIT Kurukshetra और IIM Lucknow के पूर्व छात्र हैं तथा पहले NTPC में भी काम कर चुके हैं।
कंपनी सचिव का कार्यकाल भी बढ़ा
बोर्ड ने समिति की सिफारिश पर Manohar Balwani का कंपनी सचिव एवं अनुपालन अधिकारी के रूप में कार्यकाल भी एक साल बढ़ाया। इस निर्णय से जुड़े विवरण इस प्रकार हैं:
- नया कार्यकाल 6 नवंबर 2026 से 5 नवंबर 2027 तक रहेगा।
- Balwani ने 6 नवंबर 2024 को कंपनी सचिव नामित के रूप में कंपनी ज्वाइन की थी और 1 दिसंबर 2024 को कंपनी सचिव एवं अनुपालन अधिकारी का प्रभार संभाला था।
- उन्हें चार दशकों से अधिक का अनुभव है। PFS में आने से पहले वह Power Finance Corporation Limited में कार्यकारी निदेशक-कंपनी सचिव थे।
निवेश मौद्रीकरण प्रक्रिया में समन्वय की जिम्मेदारी तय
बोर्ड ने Govinda Garg, AVP-CS या MD & CEO (अतिरिक्त प्रभार) द्वारा नामित किसी अन्य अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाने की मंजूरी भी दी। यह अधिकारी PTC India Limited और उसके नियुक्त सलाहकारों को समय पर सूचना व दस्तावेज उपलब्ध कराने तथा सहायता और समन्वय का काम करेगा।
यह निर्णय मूल कंपनी PTC India Limited के 19 मई 2026 के खुलासे के संदर्भ में लिया गया है। उसमें आवश्यक मंजूरियों के अधीन PFS में अपने निवेश के मौद्रीकरण के अवसर तलाशने की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की जानकारी दी गई थी।
PFS ने स्पष्ट किया कि यह प्राधिकरण किसी विनिवेश या शेयर हस्तांतरण की मंजूरी नहीं है और इससे किसी सौदे के अंतिम रूप लेने का संकेत भी नहीं मिलता।
