Minda Corporation का निवेश: Spark Minda-Toyodenso में ₹18 करोड़ लगाए, हिस्सेदारी 60%
Minda Corporation ने राइट्स इश्यू के जरिए अपनी सहायक कंपनी में ₹18 करोड़ लगाए हैं। निवेश परिचालन और पूंजीगत खर्च के लिए है; कंपनी की हिस्सेदारी 60% बनी रही।

Minda Corporation का निवेश अपनी सहायक कंपनी Spark Minda-Toyodenso India Private Limited में बढ़ा है। कंपनी ने 5 अक्टूबर, 2026 की BSE फाइलिंग में बताया कि उसने उसी दिन राइट्स इश्यू के तहत सहायक कंपनी के 1.8 करोड़ अतिरिक्त इक्विटी शेयर ₹18 करोड़ में खरीदे। इस लेनदेन के बाद भी सहायक कंपनी में उसकी हिस्सेदारी 60% बनी हुई है।
कंपनी के मुताबिक, यह निवेश सहायक कंपनी के कारोबार की बढ़ती परिचालन और पूंजीगत खर्च की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया गया है। Spark Minda-Toyodenso उन्नत ऑटोमोटिव स्विच के निर्माण और बिक्री का कारोबार करती है। फाइलिंग में निवेश का उद्देश्य इसी व्यवसाय की आवश्यकताओं को समर्थन देना बताया गया है।
यह खुलासा SEBI के लिस्टिंग नियमों के Regulation 30 के तहत किया गया है। कंपनी ने इसे 13 अगस्त, 2026 को भेजे गए अपने पहले पत्र के क्रम में जारी किया।
राइट्स इश्यू के बाद भी हिस्सेदारी में बदलाव नहीं
Minda Corporation ने अतिरिक्त शेयर अपने मौजूदा स्वामित्व अनुपात में खरीदे हैं। इसलिए शेयरों की संख्या बढ़ने के बावजूद Spark Minda-Toyodenso में उसकी अंतिम इक्विटी हिस्सेदारी 60% पर अपरिवर्तित रही। फाइलिंग के अनुसार, अतिरिक्त शेयरों का अधिग्रहण 5 अक्टूबर, 2026 को पूरा हो चुका है।
- खरीदे गए अतिरिक्त इक्विटी शेयरों की संख्या 1,80,00,000 है।
- प्रत्येक शेयर का अंकित मूल्य ₹10 है और खरीद इसी मूल्य पर हुई है।
- ₹18 करोड़ का भुगतान नकद प्रतिफल के रूप में सामान्य बैंकिंग माध्यम से किया गया।
- इस अधिग्रहण के लिए सरकारी या नियामकीय मंजूरी की आवश्यकता को फाइलिंग में लागू नहीं बताया गया है।
संयुक्त उद्यम का कारोबार और आय
Spark Minda-Toyodenso India Private Limited का भारत में गठन 21 अगस्त, 2025 को हुआ था। यह Minda Corporation और जापान की Toyo Denso Co., Ltd. का संयुक्त उद्यम है। इसका व्यवसाय उन्नत ऑटोमोटिव स्विच और संबंधित उत्पादों के निर्माण तथा बिक्री से जुड़ा है।
गठन की तारीख से 31 मार्च, 2026 तक की अवधि के लिए इसकी कुल आय ₹83 लाख रही। वित्त वर्ष 2024-25 और 2023-24 के आय आंकड़ों को फाइलिंग में लागू नहीं बताया गया है।
कंपनी ने स्पष्ट किया कि सहायक कंपनी संबंधित पक्ष की श्रेणी में आती है। हालांकि, उसके अनुसार राइट्स इश्यू के जरिए अतिरिक्त शेयरों की यह खरीद Companies Act, 2013 और SEBI लिस्टिंग नियमों के तहत संबंधित पक्ष लेनदेन की श्रेणी में नहीं आती।
