NEW DELHI-इस्पात मंत्रालय के लिए संसद सदस्यों की सलाहकार समिति की एक बैठक गुजरात के नर्मदा जिले के केवड़िया में "इस्पात उपयोग" विषय पर आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता इस्पात मंत्री श्री रामचंद्र प्रसाद सिंह ने की।
 
बैठक में steel minister ने कहा कि इस्पात भारत के औद्योगिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, क्योंकि यह बुनियादी ढांचे, निर्माण, इंजीनियरिंग और पैकेजिंग,ऑटोमोबाइल और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए एक महत्वपूर्ण इनपुट है। 
 
भारत स्टील का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता बन गया है। वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान, देश में कुल तैयार स्टील की खपत 96.2 मिलियन टन थी और 2024-25 तक लगभग 160 मिलियन टन (MT) और 2030-31 तक लगभग 250 मीट्रिक टन तक पहुंचने की उम्मीद है।
 
सरकार स्टील उत्पादन क्षमता को घरेलू स्तर पर बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और साथ ही साथ घरेलू मांग और स्टील के उपयोग को भी बढ़ा रही है। 
 
निर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्र स्टील के प्रमुख उपभोक्ता हैं और लगातार स्टील की बढ़ती खपत के चालक बने रहेंगे। सरकार की हाल ही में घोषित गतिशक्ति मास्टर प्लान अगले पांच वर्षों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 100 लाख करोड़ की निवेश योजना का पूरक होगा। इससे देश में स्टील के इस्तेमाल को और बढ़ावा मिलेगा।
 
माननीय सांसदों ने इस्पात क्षेत्र के संबंध में और विशेष रूप से उन पहलों के बारे में कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए जो देश में इस्पात के उपयोग को और बढ़ावा दे सकते हैं।
 
माननीय सांसद- श्री जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, विद्युत बरन महतो, सतीश चंद्र दुबे, अखिलेश प्रसाद सिंह, चंद्र प्रकाश चौधरी, सप्तगिरी शंकर उलाका और प्रतापराव गोविंदराव पाटिल चिखलीकर ने भी बैठक में भाग लिया।