रक्षा मंत्रालय के अधीन मिनी-रत्न कंपनी मिश्र धातु निगम लिमिटेड (मिधानि) में आजादी का अमृत महोत्सव के भाग के रूप में 'एक साथ लचीलापन निर्माण - सामरिक सामग्री' विषय पर एक पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। 
 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, डॉ बीएचवीएस नारायण मूर्ति, महानिदेशक, मिसाइल एवं सामरिक प्रणाली ने कहा कि सामग्री किसी भी मिसाइल कार्यक्रम का आधार होती है। 
 
उन्होंने आगे कहा कि मिसाइलों में प्रगति और उच्च प्रदर्शन उच्च तापमान सामग्री में उन्नति को देखते हुए विशेष सामग्री की बड़ी आवश्यकता होगी क्योंकि मिसाइलों की गति सुपरसोनिक से हाइपरसोनिक तक बढ़ जाती है। 
 
 
उन्होंने निर्धारित समय के भीतर परियोजना को पूरा करने के लिए सामरिक सामग्री और इसकी उपलब्धता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि मिधानि जैसे स्वदेशी स्रोतों से सामग्री की आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने की आवश्यकता है।
 
 
 इस कार्यक्रम में डॉ दशरथ राम, निदेशक डीआरडीएल और कमोडोर सिद्धार्थ मिश्रा, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, बीडीएल भी उपस्थित थे।
 
पैनल चर्चा का संचालन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मिसाइल कॉम्प्लेक्स, डीआरडीओ के परियोजना निदेशक डॉ. जैतीर्थ राघवेंद्र जोशी ने किया जिसमें डीआरडीओ, बीडीएल, डीजीएक्यूए, आरसीएमए (एम), एमएसक्यूएए, एसएसक्यूएजी, ब्रह्मोस आदि के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल) शामिल हुए। इस परिचर्चा में कई विचारों और रणनीतियों के संबंध में वैचारिक मंथन किया गया।
 
 
जैसे कि हमारी आपूर्ति श्रृंखलाओं में लचीलापन लाने, सामग्रियों के स्वदेशीकरण को मजबूति प्रदान करने की आवश्यकता है, जिससे कुछ राष्ट्रों पर देश की निर्भरता या किसी एक राष्ट्र, आपूर्तिकर्ता आदि पर अधिक निर्भरता कम हो। 
 
ऐसे कच्चे माल के लिए वैकल्पिक स्रोतों की पहचान करना, आपूर्तिकर्ताओं के साथ रणनीतिक साझेदारी में प्रवेश करना, दीर्घकालिक अनुबंध, स्टॉक जमा करना आदि न्यूनीकरण रणनीतियों को विशेष चर्चा की गई। 
 
 
अंत में यह निर्णय लिया गया कि भारतीय मिसाइल कार्यक्रम के लिए एक मजबूत लचीली सामग्री आपूर्ति श्रृंखला बनाने के लिए प्रत्येक संगठन को सक्रिय होना चाहिए और इन जोखिमों का जल्द से जल्द पता लगाना चाहिए।
 
 
आयोजन के दौरान, डॉ संजय कुमार झा, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, मिधानि ने भारत में सामरिक सामग्रियों, लौह, अलौह धातुएँ और अलॉय, कंपोजिट जैसी सामरिक सामग्रियों की भविष्य की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सही बुनियादी ढांचे और परीक्षण सुविधाओं की आवश्यकता और एडिटिव विनिर्माण के बारे में विस्तार से बताया।