नई दिल्ली: भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने भारतीय रेलवे की यह कहते हुए आलोचना की कि उसने कामकाजी खर्चों और परिचालन अनुपात को बेहतर तरीके से पेश करने के लिए "विंडो ड्रेसिंग" का सहारा लिया।
 
इसने एक ऑडिट रिपोर्ट में उजागर किया कि एनटीपीसी और कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकॉर) से प्राप्त 8,351 करोड़ रुपये का कोई भाड़ा अग्रिम नहीं था, 2018-19 के लिए परिचालन अनुपात (OR) 97.29 प्रतिशत के बजाय 101.77 प्रतिशत रहा होगा; जो इन्होंने इस् वर्ष में हासिल किया।
 
परिचालन अनुपात की गणना इस आधार पर की जाती है कि रेलवे प्रत्येक रुपया कमाने के लिए कितना पैसा खर्च करता है। यह ट्रैफिक कमाई के लिए काम करने के खर्च का अनुपात है। ऑपरेटिंग अनुपात जितना कम होगा, रेलवे की वित्तीय ताकत उतनी ही बेहतर होगी।