प्रथम विशाखापत्तनम श्रेणी विध्वंसक नौसेना को हुई सुपुर्द
<p> पी15बी की दूसरी जहाज मोरमुगाओ का जलावतरण 17 सितंबर 2016 को किया गया और यह हारबर ट्रायल्स के बाद समुद्री परीक्षण आरंभ करेगा। तीसरी जहाज (इम्फाल) का जलावतरण 20 अप्रैल 2019 को किया गया और यह अभी बाह्य सज्जा के अग्रिम चरण में है।</p>

माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) ने परियोजना 15बी श्रेणी विध्वंसक यानि यार्ड 12704 (विशाखापत्तनम) को 28.10.2021 को भारतीय नौसेना को सुपुर्द किया।
स्वीकृति दस्तावेज, एमडीएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, वाइस एडमिरल नारायण प्रसाद, एवीएसएम, एनएम, भानौ(नि) और रियर एडमिरल के पी अरविंदम, वीएसएम, सीएसओ (टेक) ने एमडीएल निदेशकों और नौसेना कार्मिकों की उपस्थिति में एमडीएल में हस्ताक्षर किया।
इस पोत का निर्माण स्वदेशी स्टील डीएमआर 249ए का उपयोग करके किया गया है और यह भारत में निर्मित सबसे लंबा विध्वंसक है। इसकी संपूर्ण लम्बाई 164 मीटर और विस्थापन क्षमता 7500 टन है।
यह पोत महत्वपूर्ण प्लेटफार्म है जो विभिन्न लक्ष्यों और कार्यो को पूरा करने में सक्षम समुद्री युद्ध के पूरे स्पेक्ट्रम में फैला हुआ है। यह पोत सुपरसोनिक सरफेस टू सरफेस ‘ब्रह्मोस’ मिसाईल तथा ‘बराक-8’ लॉन्ग रेंज सरफेस टू एयर मिसाईल से सुसज्जित है।
इस अंडरसी वारफेयर कैपेबल डिस्ट्रायर में स्वदेशी रूप विकसित एंटी सबमैरीन वेपन और सेंसर लगाये गये हैं मुख्य रूप से, हल माउंटेड सोनार हमसा एनजी, हेवी वेट टारपीडो ट्यूब लांचर्स, राकेट लांचर्स आदि।
यह पहले के विध्वंसक और युद्धपोतों की अपेक्षा सार्थक रूप से अधिक बहुमुखी है। विशाखापत्तनम पूर्ण रूप से दुश्मन पनडुब्बियों, सरफेस वारशिप, एंटी सबमैरीन मिसाईल और फाईटर एयर क्राफ्ट इसे बिना किसी सहायक जलयान की झुड के परिचालन करने में सक्षम बनाया हो और यह स्वतंत्र रूप से नेवल टास्क फोर्स के फ्लैग शिप के रूप में भी कार्य करेगी।
इस जहाज पर 312 कार्मिको के रहने की व्यवस्था है और इसकी क्षमता 4000 नौटिकल माइल की है और यह टिपीकल 42 दिनों के लक्ष्य को पूरा करने में समर्थ है जो विस्तारित लक्ष्य समय परिचालन क्षेत्र से बाहर पूरा कर सकती है। यह जहाज शक्तिशाली संयुक्त गैस और गैस (सीओजीएजी) प्रोपल्सन प्लांट द्वारा संचालित है इसमें चार रिवर्सीबल गैस टरबाईन शामिल हैं जो इसे 30 नाट (लगभग 55 के एमपीएच) की गति प्राप्त करने में सहयोग करते हैं।
इस जहाज में एक उच्च स्तरीय ऑटोमेशन के साथ परिस्कृत डिजिटल नेटवर्क शामिल है जैसे गीगा बीट इथरनेट आधारित शिप डाटा नेटवर्क (जीईएसडीएन) कम्बेट मैनेजमेंट सिस्टम (सीएमएस) ऑटोमैटिक पावर मैनेजमेंट सिस्टम, (एपीएमएस) और इंटीग्रेटेट प्लेटफार्म मैनेजमेंट सिस्टम (आईपीएमएस)।
पी15बी श्रेणी विध्वंसक में स्वदेशी मात्रा अभी 72% है जो इसके पूर्ववर्ती पी15ए में 59% और पी15 श्रेणी विध्वंसक में 42% था। यह भारत सरकार के मेक इन इंडिया प्रोग्राम की अभिपुष्टि है।
पी15बी की दूसरी जहाज मोरमुगाओ का जलावतरण 17 सितंबर 2016 को किया गया और यह हारबर ट्रायल्स के बाद समुद्री परीक्षण आरंभ करेगा। तीसरी जहाज (इम्फाल) का जलावतरण 20 अप्रैल 2019 को किया गया और यह अभी बाह्य सज्जा के अग्रिम चरण में है। चौथी जहाज ब्लॉक इरेक्सन के अंतर्गत है और वर्तमान वित्त वर्ष में इसका जलावतरण किया जाएगा।
एमडीएल हमेशा देश के प्रगामी स्वदेशी युद्धपोत और पनडुब्बी निर्माण कार्यक्रम में सबसे आगे रहा है। लिएंडर और गोदावरी श्रेणी युद्धपोत, खुकरी श्रेणी कारवेटस, मिसाईल बोट्स, दिल्ली और कोलकाता श्रेणी विध्वंसक, शिवालिक श्रेणी स्टील्थ युद्धपोत, एसएसके पनडुब्बी और तीन स्कोर्पिन पनडुब्बी इसके अंतर्गत हैं।
एमडीएल का आधुनिक इतिहास भारत में स्वदेशी युद्धपोत और पनडुब्बी निर्माता का युग है इसके माध्यम से कंपनी ने राष्ट्र का ‘युद्धपोत और पनडुब्बी निर्माता’ की उपाधि प्राप्त किया है।
