केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों के लिए आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया उद्घाटन
केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 15 मई 2023 को नई दिल्ली में आईसीपीएस द्वारा विधायी प्रारूपण पर आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

नई दिल्ली : केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 15 मई 2023 को नई दिल्ली में संसद, राज्य विधानसभाओं, विभिन्न मंत्रालयों, वैधानिक निकायों और अन्य सरकारी विभागों के अधिकारियों के लिए प्राइड और आईसीपीएस द्वारा विधायी प्रारूपण पर आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी, श्री अर्जुन राम मेघवाल और केंद्रीय गृह सचिव सहित कई गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
उद्घाटन समारोह के दौरान श्री अमित शाह का सम्बोधन
श्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि विधायी प्रारूपण हमारे लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण घटक है और इसके बारे में ज्ञान की कमी न केवल कानूनों को कमजोर करती है, बल्कि पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करती है और यह न्यायपालिका के कामकाज को भी प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि उसकी विधायी कार्य कौशल समय के साथ उन्नत और अधिक कुशल होती रहे। इस दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने स्वतंत्रता सेनानी सुखदेव की जयंती और पूर्व उपराष्ट्रपति श्री भैरों सिंह शेखावत की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
श्री अमित शाह ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में स्वीकार किया जाता है और एक तरह से लोकतंत्र का जन्म भारत में ही हुआ था क्योंकि इसका विचार भारत में ही उभरा था। उन्होंने कहा कि हमने पूरे भारत में लोकतंत्र की परंपराओं को शामिल किया है। श्री शाह ने कहा कि भारत के संविधान को दुनिया का सबसे संपूर्ण संविधान माना जाता है और जिन लोगों ने हमारे संविधान को बनाया, उन्होंने न केवल देश के पारंपरिक लोकतांत्रिक मूल्यों को इसमें शामिल किया, बल्कि समकालीन समय की जरूरतों के अनुसार इसे आधुनिक बनाने का भी प्रयास किया।
केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र के तीन मुख्य स्तंभ हैं- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका और हमारे संविधान निर्माताओं ने इन्हीं तीन स्तंभों पर हमारी पूरी लोकतांत्रिक शासन प्रणाली का निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि इन तीनों प्रणालियों के कार्यों को कुशलतापूर्वक विभाजित किया गया है। श्री शाह ने कहा कि विधायिका का कार्य लोक कल्याण और जनता की समस्याओं पर विचार करना और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए समाधान निकालना है। उन्होंने कहा कि संसद विश्व स्तर पर विभिन्न क्षेत्रों में देखे जा रहे परिवर्तनों पर चर्चा करती है और तदनुसार नए कानून बनाती है और हमारी व्यवस्था को और अधिक प्रासंगिक बनाने के लिए पुराने कानूनों का संशोधन भी करती है। नतीजतन, नए बनाए गए कानून की भावना का पालन करते हुए, कार्यपालिका इसे लागू करने का अपना कार्य करती है। श्री शाह ने कहा कि हमारे देश में विवाद की स्थिति में कानून की व्याख्या के लिए न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से काम करती है। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने हमारी पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था में इन तीन स्तंभों की भूमिकाओं को विभाजित किया है।
श्री अमित शाह ने कहा कि विधायी विभाग का काम संसद और केंद्रीय मंत्रिमंडल की राजनीतिक इच्छा को कानून बनाना है। उन्होंने कहा कि विधायी विभाग का कार्य राजनीतिक इच्छाशक्ति और लोगों की समस्याओं और देश की विभिन्न आवश्यकताओं को हल करने के तरीकों को कानूनी प्रारूप प्रदान करना है और इस कारण से प्रारूपण का बहुत महत्व है। श्री शाह ने कहा कि यदि प्रारूपण बेहतर है, तो कार्यपालिका द्वारा त्रुटियों की न्यूनतम संभावना के साथ कानून के बारे में शिक्षित करना आसान होगा।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि संसद सरकार का सबसे शक्तिशाली अंग है और इसकी ताकत कानून है। उन्होंने कहा कि विधायी प्रारूपण किसी भी देश को अच्छे तरीके से चलाने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। श्री शाह ने कहा कि संसद और जनता की इच्छा को कानून में बदलते समय कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है, जैसे संविधान, रीति-रिवाज, संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत, शासन की संरचना, समाज, देश का सामाजिक-आर्थिक विकास और अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ। श्री शाह ने कहा कि विधायी प्रारूपण कोई विज्ञान या कला नहीं है, बल्कि यह एक कौशल है जिसे भावना के साथ प्रयोग करना होता है।
श्री अमित शाह ने कहा कि सरकार की नीतियों को कानून में बदलने की प्रक्रिया के दौरान पुराने और कम विवादास्पद कानूनों का अध्ययन जरूरी है। उन्होंने कहा कि लेखन एक कौशल है और विधायी प्रारूपण में विराम चिह्नों का बहुत सावधानी और कौशल के साथ उपयोग किया जाना चाहिए। इसके अलावा ड्राफ्ट्समैन की भाषा पर भी अच्छी पकड़ होनी चाहिए क्योंकि अपनी भाषा की भावना को दर्शाना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि हर भाषा की एक सीमा होती है और केवल शब्दों के अनुवाद से काम नहीं चलेगा, बल्कि भाव का अनुवाद होना चाहिए।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि क्षमता निर्माण एक सतत प्रक्रिया है और संसद के प्रत्येक विभाग, राज्यों के राज्य विधानसभाओं में कानून बनाने वाली टीम के कौशल का उन्नयन करना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है और हमें बदलती दुनिया के साथ तालमेल बिठाना होगा और अपने कानूनों को भी आज की जरूरतों के हिसाब से ढालना होगा।
