नई दिल्ली : विद्युत मंत्रालय में सचिव श्री आलोक कुमार की अध्यक्षता में विद्युत मंत्रालय ने ‘भारत में विद्युत बाजार के विकास’ के लिए एक समूह का गठन किया था। इसमें विद्युत मंत्रालय, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण, केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग, भारत के ग्रिड नियंत्रक (ग्रिड-इंडिया) महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु की राज्य सरकारों का प्रतिनिधित्व शामिल है। भारत में बिजली बाजार नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण बदलावों से गुजरने के लिए तैयार है।
 
इस समूह के दौरान केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री आर.के.सिंह को रिपोर्ट प्रस्तुत की
 
समूह ने ‘भारत में बिजली बाजार के विकास’ की दिशा में आने वाले प्रमुख मुद्दों को संबोधित करने के लिए व्यापक समाधान प्रस्तावित किया है, जिसमें मज़बूत दीर्घकालिक अनुबंधों का प्रभुत्व, एक बड़े और समकालिक ग्रिड की अंतर्निहित विविधता का उपयोग और केंद्र में संसाधन पर्याप्तता योजना की आवश्यकता शामिल है। इसका उद्देश्य राज्यों, स्व-निर्धारण पर कम निर्भरता के माध्यम से प्रणाली की अक्षमताओं में कमी, समग्र ऊर्जा मिश्रण में अक्षय ऊर्जा की बढ़ती हिस्सेदारी, नवीकरणीय ऊर्जा के लिए बाजार भागीदारी को प्रोत्साहित करना और अच्छी तरह से विकसित सहायक सेवा बाजार के माध्यम से सहायक सेवाओं की खरीद में मज़बूती करना शामिल है। समाधानों का उद्देश्य ग्रिड में ऊर्जा उपयोग में परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा के एकीकरण को सक्षम करने के लिए एक कुशल, अधिकतम और विश्वसनीय बाजार व्यवस्था को तैयार करना है।
समूह ने भविष्य के भारतीय बिजली बाजार के नए स्वरूप में रूपरेखा और विशिष्ट सिफारिशों को रेखांकित किया है
 
समूह ने कम, मध्यम और दीर्घावधि के लिए हस्तक्षेपों को रेखांकित करते हुए एक रूपरेखा की भी सिफारिश की है। हस्तक्षेपों में निगरानी करने के लिए एक व्यवस्था स्थापित करना शामिल है कि राज्य उपयोगिताओं द्वारा आपूर्ति की पर्याप्तता को बनाए रखने के लिए क्या किया जा रहा है, भविष्य के बाज़ार की प्रभावशीलता में वृद्धि करना, द्वितीयक भंडार के लिए बाजार-आधारित व्यवस्था शुरू करना और 5-मिनट के आधार पर मीटरिंग, शेड्यूलिंग , प्रेषण, और निपटान को लागू करना शामिल है। प्रस्तावित परिवर्तनों में मांग प्रतिक्रिया और एकत्रीकरण भी शामिल है, जो आरक्षित आवश्यकताओं और बिजली की लागत को कम कर सकता है। भागीदारी पर नज़र रखने और मूल्यों में उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए बाज़ार की निगरानी और देख-रेख गतिविधियों को मजबूत किया जाएगा। विचलन प्रबंधन के लिए एक क्षेत्रीय स्तर संतुलन व्यवस्था लागू की जाएगी जिसके परिणामस्वरूप आईएसटीएस स्तर पर राज्यों के लिए विचलन दंड में कमी आएगी और इसके परिणामस्वरूप आरक्षित आवश्यकताएं कम होंगी।
 
केंद्रीय मंत्री श्री आर.के.सिंह का सम्बोधन 
 
केंद्रीय ऊर्जा और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री आर.के.सिंह ने इस अवसर पर अपने संबोधन में समूह द्वारा किए गए कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि प्रस्तावित सुधार भारत के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण हैं और यह सुधार अक्षय ऊर्जा में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण भी बनाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि परिवर्तन अक्षय ऊर्जा के बेहतर ग्रिड एकीकरण को सक्षम करेंगे और स्वच्छ, हरित भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेंगे। श्री सिंह ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा की ओर भारत के ऊर्जा उपयोग में परिवर्तन ने नए ऊर्जा क्रम के अंतर्गत संचालन और बिजली बाजार के विकास को सक्षम करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है।
केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ने यह भी कहा कि हमें अन्य देशों में अपनाई जा रही प्रथाओं पर निर्भर रहने के बजाय अपने स्वयं के समाधान खोजने की आवश्यकता है। श्री सिंह ने कहा, ‘भारत समय पर हस्तक्षेप करने में सबसे आगे रहा है और पिछले एक वर्ष में ऊर्जा संकट के दौरान बिजली के मूल्यों को नियंत्रण में रखने में भी सक्षम रहा है, जबकि कई विकसित देशों के बिजली बाजारों में बिजली की कीमतें कई गुना बढ़ गई हैं।‘ मंत्री महोदय ने क्षमता अनुबंधों को डिजाइन करते समय सबसे कुशल बिजली उत्पादन क्षमता की खरीद सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया और अब से 12 से 15 वर्ष की अवधि के दीर्घकालिक पीपीए (बिजली खरीद समझौते) की सिफारिशों पर भी सहमति व्यक्त की। केंद्रीय मंत्री महोदय ने प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अंतर के लिए अनुबंध (सीएफडी) पद्धति के आधार पर नई नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का तुरंत विकास करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि विद्युत विनिमय समाशोधन इंजन को केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) द्वारा मान्य किया जा सकता है।
 
वर्ष 2022-23 के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारतीय बिजली बाजार में कुल कारोबार की मात्रा 1,02,276 मिलियन यूनिट थी, जो 16,24,465 मिलियन यूनिट के सभी स्रोतों (नवीकरणीय ऊर्जा सहित) से उत्पन्न ऊर्जा के केवल एक छोटे हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है। वर्ष 2022-23 में बिजली की अधिकतम मांग 215.8 गीगा वॉट थी, और इसके वर्ष 2029-30 तक बढ़कर 335 गीगा वॉट होने की आशा है।
 
विद्युत मंत्रालय की बिजली बाजार सुधारों की दिशा में पहल और भारत में बिजली बाजार के विकास के लिए समूह द्वारा प्रस्तावित हस्तक्षेपों के साथ मिलकर, भारत के बिजली बाजारों को बदल देगी और देश को अपने ऊर्जा लक्ष्यों को स्थायी तरीके से हासिल करने में सहयता करेगी।