नई दिल्ली : कोयला कंपनियों की फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) परियोजनाओं की प्रगति का आकलन करने के लिए कोयला मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव श्री एम. नागराजू की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। 
 
कोयला मंत्रालय ने 67 एफएमसी परियोजनाओं (59 - सीआईएल, 5- एससीसीएल और 3 - एनएलसीआईएल) के विकास कार्य पर चर्चा की जो प्रति वर्ष करीब 885 मीट्रिक टन कोयला लोड करने की क्षमता रखेगी और ये परियोजनाएं 2027 तक पूरी हो जाएंगी।
 

खानों में कोयले के सड़क परिवहन को खत्म करने के लिए मंत्रालय ने एफएमसी परियोजना के तहत मशीनीकृत कोयला परिवहन और लोडिंग प्रणाली में सुधार की योजना विकसित की हैं, जिसमे :- क्रशिंग, कोयले का आकार, और त्वरित कंप्यूटर-असिस्टेड लोडिंग कोल हैंडलिंग प्लांट्स (सीएचपी) और रैपिड लोडिंग सिस्टम शामिल हैं ।

कम मानवीय हस्तक्षेप, सटीक पूर्व-तौलित मात्रा, तेज लोडिंग, और बेहतर कोयले की गुणवत्ता सभी एफएमसी परियोजनाओं के लाभ हैं। लदान समय कम होने पर रेक और वैगन भी अधिक आसानी से उपलब्ध होंगे और इसकी मदद से सड़कों पर कम ट्रैफिक होगा जिसका मतलब है कम प्रदूषण और कम डीजल की खपत।
 
कोयला मंत्रालय ने वित्त वर्ष 25 में 1.3 बिलियन टन और वित्त वर्ष 30 में 1.5 बीटी कोयला उत्पन्न करने का लक्ष्य रखा है ताकि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाया जा सके और आयातित कोयले पर निर्भरता ख़त्म हो।