नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि भारत में रहने वाले किसी भी अफगान नागरिक को उसकी मंजूरी के बिना देश छोड़ने के लिए नहीं कहा जाएगा। 
 
अधिकारीयों  ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विदेशियों के क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय की शक्तियों को छीन लिया है जिसके द्वारा वे अफगानिस्तान में अस्थिर स्थिति की पृष्ठभूमि में किसी भी अफगान नागरिक को भारत छोड़ने के लिए कह सकते हैं। 
 
अब इस तरह के निर्णय केवल मंत्रालय द्वारा अफगान नागरिकों के संभावित स्थानीय स्तर पर उत्पीड़न को रोकने के लिए लिए जा सकते हैं।
 
यह फैसला अफगान संसद की एक महिला सदस्य रंगिना कारगर को दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे से निर्वासित किए जाने के बाद आया है।
 
इस्तांबुलवैध कागजात के बावजूद उन्हे निर्वासित कर दिया गया था। सरकार ने बाद में कारगर से माफी मांगी थी।
 
 
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि विदेशियों के क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) द्वारा किसी भी अफगान नागरिक को गृह मंत्रालय की पूर्व मंजूरी के बिना भारत छोड़ने के लिए नहीं कहा जाएगा और ऐसे मामलों को एफआरआरओ द्वारा एमएचए को भेजा जाएगा।
 
 
गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि विदेशियों के क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (एफआरआरओ) द्वारा किसी भी अफगान नागरिक को गृह मंत्रालय की पूर्व मंजूरी के बिना भारत छोड़ने के लिए नहीं कहा जाएगा और ऐसे मामलों को एफआरआरओ द्वारा एमएचए को भेजा जाएगा।
 
(पीटीआई)