Sansera Engineering QIP के फंड उपयोग में सितंबर तिमाही के दौरान कोई विचलन नहीं पाया गया। कंपनी ने 27 अक्टूबर, 2026 को BSE में दाखिल सूचना में 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही की ICRA Limited की निगरानी रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट के अनुसार, जुटाई गई राशि का इस्तेमाल निर्गम के घोषित उद्देश्यों के अनुरूप हुआ है।

कंपनी ने अक्टूबर 2024 में इक्विटी शेयरों के QIP के जरिए ₹1,200 करोड़ जुटाए थे। निर्गम खर्च के बाद शुद्ध प्राप्तियां ₹1,174.979 करोड़ थीं। ICRA ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के लिए सकल प्राप्तियों की निगरानी की है।

सितंबर तिमाही में कंपनी ने सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के तहत ₹30 करोड़ सहायक कंपनी में निवेश किए। इसके साथ निर्गम खर्च सहित कुल उपयोग ₹974.306 करोड़ हो गया, जो तिमाही की शुरुआत में ₹944.306 करोड़ था। 30 सितंबर को मूल निर्गम राशि में से ₹225.694 करोड़ अप्रयुक्त थे।

कर्ज भुगतान और विस्तार के लिए आवंटित राशि खर्च

रिपोर्ट में अलग-अलग उद्देश्यों के लिए आवंटन और उपयोग की स्थिति दी गई है:

  • कर्ज चुकाने या समय से पहले भुगतान के लिए निर्धारित ₹700 करोड़ का पूरा उपयोग हो चुका है।
  • नए विनिर्माण संयंत्र के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण मद में ₹100 करोड़ आवंटित थे। इसमें ₹92.591 करोड़ खर्च हुए और ₹7.409 करोड़ शेष हैं।
  • मौजूदा विनिर्माण सुविधाओं के विस्तार और विकास के लिए निर्धारित ₹100 करोड़ पूरी तरह इस्तेमाल हो चुके हैं।
  • सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए आवंटित ₹274.979 करोड़ में से ₹56.694 करोड़ इस्तेमाल हुए हैं; ₹218.285 करोड़ बाकी हैं।

सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के तहत उपयोग में नवीकरणीय ऊर्जा, सहयोगी कंपनी और सहायक कंपनी में निवेश शामिल हैं। निगरानी रिपोर्ट ने उपयोग में विचलन नहीं पाया, हालांकि भूमि अधिग्रहण और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों की राशि खर्च करने में निर्धारित समयसीमा के मुकाबले देरी दर्ज है। शेष उपयोग वित्त वर्ष 2026-27 में होने की उम्मीद बताई गई है।

शेष रकम बैंक जमा और निगरानी खाते में

अप्रयुक्त रकम के निवेश विवरण में HDFC Bank और AXIS Bank की सावधि जमाओं तथा निगरानी खाते में कुल ₹261.603 करोड़ दर्शाए गए हैं। इसमें सावधि जमाओं से अर्जित ₹35.909 करोड़ की ब्याज आय भी शामिल है। इसलिए यह आंकड़ा मूल निर्गम की अप्रयुक्त राशि से अधिक है।

ICRA ने स्पष्ट किया कि निगरानी रिपोर्ट उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित है। एजेंसी ऑडिट नहीं करती और प्राप्त सूचनाओं का स्वतंत्र सत्यापन भी नहीं करती। रिपोर्ट किसी प्रतिभूति में लेनदेन की सिफारिश नहीं है।