DLF की निवेश योजना के तहत कंपनी Everstone Group के साथ प्रस्तावित संयुक्त उद्यम (JV) में लगभग ₹3,750 करोड़ लगाएगी। DLF Ltd ने 6 नवंबर 2026 की BSE फाइलिंग में बताया कि दोनों पक्षों ने IREO Private Limited और समूह की अन्य भारतीय कंपनियों में निवेश के लिए उसी दिन बाध्यकारी और विशिष्ट टर्म शीट पर हस्ताक्षर किए हैं। सौदा अभी अंतिम दस्तावेजों और अन्य शर्तों के पूरा होने पर निर्भर है।

इस व्यवस्था में DLF प्रस्तावित JV में बहुमत हिस्सेदारी लेना चाहती है। JV उन IREO भारतीय कंपनियों में आर्थिक हित रखेगा, जिनका स्वामित्व फिलहाल IREO समूह के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश वाले फंडों (IREO Funds) के पास है। इन फंडों में वैश्विक निवेशकों का निवेश है। Everstone सिंगापुर मुख्यालय वाला वैश्विक निवेश प्रबंधक है।

हिस्सेदारी और आर्थिक हित की संरचना

पक्षों ने IREO Funds के साथ भी 6 नवंबर को एक अलग बाध्यकारी और विशिष्ट टर्म शीट की है। प्रस्तावित निवेश की संरचना इस प्रकार है:

  • JV निवेश राशि से IREO की भारतीय कंपनियों में कम-से-कम 20% हिस्सेदारी और संचालन व्यवस्था से जुड़े कुछ अधिकार हासिल करेगा।
  • अनुबंध आधारित और अन्य हित मिलाकर JV का कुल आर्थिक हित लगभग 40% होगा। शेष आर्थिक हित IREO Funds के पास रहेगा।
  • सौदा पूरा होने पर एक स्वतंत्र प्रबंधन टीम सहमत कारोबारी योजना लागू करेगी। यह टीम तय प्रशासनिक ढांचे में DLF और Everstone के मार्गदर्शन में काम करेगी।

इस तरह प्रस्तावित न्यूनतम शेयर हिस्सेदारी और कुल आर्थिक हित अलग-अलग हैं। DLF के अनुसार, संबंधित परिसंपत्तियों का आकार और स्थान दिल्ली, गुरुग्राम तथा अन्य क्षेत्रों में विकास का अवसर देते हैं। गठजोड़ में DLF का रियल एस्टेट विकास अनुभव और Everstone की निवेश प्रबंधन क्षमताएं शामिल होंगी।

2027 में सौदा पूरा होने की उम्मीद

कंपनी ने सौदा 2027 के दौरान पूरा होने की उम्मीद जताई है। इसके लिए संतोषजनक जांच-पड़ताल, सभी लागू कॉरपोरेट, नियामकीय और तीसरे पक्ष की मंजूरियां तथा अंतिम समझौतों पर हस्ताक्षर जरूरी हैं।

DLF के प्रबंध निदेशक Ashok Kumar Tyagi ने साझेदारी के जरिए IREO की भारतीय कंपनियों की विकास क्षमता का उपयोग करने की बात कही। Everstone के सह-संस्थापक और CEO Sameer Sain ने IREO Funds के निवेशकों के लिए मूल्य सृजन को साझेदारी का उद्देश्य बताया। DLF ने एक्सचेंजों को सूचित किया कि अंतिम दस्तावेजों के निष्पादन के बाद SEBI के सूचीबद्धता नियमों के तहत विस्तृत खुलासा किया जाएगा।