Cubex Tubings के नतीजे में Q2 FY27 का कर पश्चात लाभ सालाना 162% बढ़कर ₹4.57 करोड़ रहा। कंपनी की 24 अक्टूबर 2026 की BSE फाइलिंग में दी गई प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 30 सितंबर को समाप्त तिमाही में परिचालन राजस्व ₹82.99 करोड़ और EBITDA ₹7.15 करोड़ रहा। ये एकल वित्तीय नतीजे अनऑडिटेड हैं।

सीमलेस कॉपर और कॉपर अलॉय ट्यूब, रॉड तथा वायर बनाने वाली कंपनी का राजस्व पिछली तिमाही से 28% बढ़ा। इसी आधार पर कर पश्चात लाभ में 235% और EBITDA में 408% की वृद्धि हुई। सालाना आधार पर EBITDA 119% बढ़ा, जबकि EBITDA मार्जिन 8.62% रहा। मार्जिन में तिमाही आधार पर 645 आधार अंकों का सुधार दर्ज हुआ।

प्रबंध निदेशक Virendra Bhandari के अनुसार, स्थापित कॉपर अलॉय कारोबार में बिक्री की मात्रा बढ़ाने और अधिक मूल्य वाले सीमलेस उत्पादों की हिस्सेदारी सुधारने से प्रदर्शन को समर्थन मिला। उन्होंने लागत नियंत्रण और कच्चे माल की कीमतों में बदलाव ग्राहकों तक पहुंचाने वाली मूल्य निर्धारण व्यवस्था को भी इसकी वजह बताया।

छमाही में ऑर्डर और पूंजी जुटाने की योजना

कंपनी को H1 FY27 में विभिन्न क्षेत्रों से कुल ₹81.27 करोड़ के ऑर्डर मिले। क्षेत्रवार विवरण इस प्रकार है:

  • हीट एक्सचेंजर: ₹47 करोड़।
  • इलेक्ट्रिकल उद्योग, जिसमें पैनल, डेटा सेंटर और केबल शामिल हैं: ₹33 करोड़।
  • अन्य क्षेत्र: ₹1.27 करोड़।

प्रबंधन के बयान के अनुसार, बोर्ड ने ₹75 करोड़ के प्रेफरेंशियल वारंट इश्यू को मंजूरी दी है। प्रस्तावित इश्यू में बड़ा हिस्सा प्रवर्तक समूह द्वारा लिए जाने की बात कही गई है। जुटाई जाने वाली पूंजी का उपयोग कंपनी की अलॉय निर्माण क्षमताओं के अगले चरण के लिए होगा।

30 सितंबर 2026 को नेटवर्थ ₹89.2 करोड़ थी, जो 31 मार्च 2026 को ₹83.3 करोड़ थी। कुल उधारी ₹44.3 करोड़ पर लगभग स्थिर रही, हालांकि वित्तपोषण का रुझान लंबी अवधि की उधारी की ओर बढ़ा।

रिटर्न अनुपात और मांग का परिदृश्य

H1 FY27 का वार्षिकीकृत ROE 13.7% और ROCE 15.8% रहा, जबकि FY26 में ये क्रमशः 8.9% और 10.7% थे। केवल दूसरी तिमाही के वार्षिकीकृत आधार पर ROE 21.2% और ROCE 22.7% रहा।

कंपनी के अनुसार, तापीय और परमाणु ऊर्जा क्षमता विस्तार, रिफाइनरी, नौसैनिक जहाज निर्माण तथा विलवणीकरण परियोजनाएं कॉपर अलॉय ट्यूबों की मांग को समर्थन दे रही हैं। छमाही में तांबे की कीमतें ऊंची रहीं। मूल्य निर्धारण व्यवस्था लागत में उतार-चढ़ाव का असर सीमित करती है, लेकिन भंडार की खरीद और खपत के समय से तिमाही मार्जिन बदल सकता है।

कंपनी ने बताया कि अनऑडिटेड नतीजे वैधानिक लेखापरीक्षकों की सीमित समीक्षा के अधीन हैं और इन्हें एक्सचेंजों में दाखिल परिणामों तथा संबंधित टिप्पणियों के साथ पढ़ा जाना चाहिए।