इसरो का स्पष्टीकरण: निजीकरण की अफवाहें निराधार, अंतरिक्ष क्षेत्र में भूमिका और मजबूत होगी
इसरो के अनुसार, निजी क्षेत्र की भागीदारी का उद्देश्य संगठन की भूमिका घटाना नहीं, बल्कि उसे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की अगली पीढ़ी पर और अधिक ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाना है। उद्योग परिपक्व तकनीकों और क्षमताओं का विस्तार करेगा, जबकि इसरो उन्नत अनुसंधान, नई तकनीकों और जटिल राष्ट्रीय मिशनों पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगा।

बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने रविवार को एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कर मीडिया में फैली उन अटकलों और गलत सूचनाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि इसरो का निजीकरण किया जा रहा है या इसकी भूमिका कम की जा रही है। संगठन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इसरो का न तो निजीकरण होगा और न ही इसकी महत्ता कम होगी।
इसरो के अनुसार, निजी क्षेत्र की भागीदारी का उद्देश्य संगठन की भूमिका घटाना नहीं, बल्कि उसे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की अगली पीढ़ी पर और अधिक ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाना है। उद्योग परिपक्व तकनीकों और क्षमताओं का विस्तार करेगा, जबकि इसरो उन्नत अनुसंधान, नई तकनीकों और जटिल राष्ट्रीय मिशनों पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगा।
इसरो ने बताया कि वर्ष 2020 से शुरू हुए अंतरिक्ष क्षेत्र सुधारों और भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 के माध्यम से एक बड़ा, मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारतीय अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उद्योग, स्टार्टअप और शैक्षणिक संस्थानों को अंतरिक्ष मूल्य श्रृंखला में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि वे इसरो की क्षमताओं का पूरक बन सकें और उन्हें गुणित कर सकें।
संगठन ने जोर देकर कहा कि इन सुधारों को निजीकरण के रूप में नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के विस्तार और क्षमता गुणन के रूप में देखा जाना चाहिए। भारत की औद्योगिक और तकनीकी क्षमताओं के विकास के साथ अब परिपक्व और बड़े पैमाने पर लागू की जा सकने वाली गतिविधियाँ भारतीय उद्योग द्वारा संपन्न की जा सकती हैं। इससे बड़े पैमाने पर उत्पादन, व्यावसायीकरण, नवाचार और वैश्विक बाजारों तक पहुँच संभव होगी।
इसरो ने स्पष्ट किया कि वह उन्नत अंतरिक्ष अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास, राष्ट्रीय एवं रणनीतिक मिशनों, अंतरिक्ष विज्ञान एवं अन्वेषण तथा महत्वपूर्ण एवं अग्रणी क्षमताओं के लिए भारत की प्रमुख संस्था बना रहेगा। इसकी भूमिका उन क्षेत्रों में और मजबूत होगी जहाँ वैज्ञानिक विशेषज्ञता सर्वाधिक महत्वपूर्ण है—अग्रणी अनुसंधान एवं विकास, उन्नत तकनीकें, मानव अंतरिक्ष उड़ान, अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण तंत्र, गहन अंतरिक्ष एवं ग्रह मिशन तथा रणनीतिक राष्ट्रीय क्षमताएँ।
संगठन ने कहा कि परिपक्व प्रक्षेपण वाहनों, नियमित उपग्रहों और स्थापित प्रणालियों का उत्पादन उद्योग या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा प्रतिस्पर्धी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जा सकता है। इससे इसरो के वैज्ञानिक और तकनीकी जनशक्ति को अगली पीढ़ी की तकनीकों तथा मिशनों पर अधिक संसाधन लगाने का अवसर मिलेगा।
