Purple Style Labs Q1 FY27: राजस्व ₹119 करोड़, शुद्ध घाटा घटकर ₹88 करोड़
Purple Style Labs का जून तिमाही राजस्व ₹119 करोड़ रहा और शुद्ध घाटा घटकर ₹88 करोड़ हुआ। नए स्टोरों की लागत से EBITDA घाटा बढ़ा, लेकिन परिचालन नकदी बहिर्वाह घटा।

Purple Style Labs Q1 FY27 के नतीजों पर 29 सितंबर को हुई आय कॉन्फ्रेंस कॉल का ट्रांसक्रिप्ट कंपनी ने 6 अक्टूबर 2026 की BSE फाइलिंग में प्रस्तुत किया। इसके अनुसार, 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही में परिचालन राजस्व बढ़कर ₹119 करोड़ रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह ₹106 करोड़ था। शुद्ध घाटा ₹100 करोड़ से घटकर ₹88 करोड़ रह गया।
हालांकि, EBITDA स्तर पर घाटा बढ़कर ₹11 करोड़ हो गया, जो एक साल पहले ₹4 करोड़ था। कंपनी के पूर्णकालिक निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी Abhishek Agarwal ने इसकी वजह चार नए बड़े अनुभव केंद्रों से जुड़ी बढ़ी लागत बताई। सकल लाभ ₹43 करोड़ रहा और सकल मार्जिन पिछले साल की समान तिमाही के बराबर 36% बना रहा।
औसत ऑर्डर मूल्य बढ़ा, कार्यशील पूंजी घटी
Pernia's Pop-Up Shop संचालित करने वाली कंपनी का सकल व्यापार मूल्य यानी GMV जून तिमाही में ₹133 करोड़ से बढ़कर ₹193 करोड़ हो गया। औसत ऑर्डर मूल्य ₹66,000 से बढ़कर ₹86,000 रहा। प्रबंधन ने इसे अधिक मूल्य वाले लेनदेन और लक्जरी श्रेणियों पर केंद्रित कारोबार से जोड़ा।
- इन्वेंटरी पिछले साल की समान तिमाही के ₹174 करोड़ से घटकर ₹159 करोड़ रही।
- शुद्ध कार्यशील पूंजी ₹105 करोड़ से घटकर ₹66 करोड़ रह गई।
- ग्राहकों से प्राप्त अग्रिम राशि ₹37 करोड़ से बढ़कर ₹49 करोड़ हुई।
- परिचालन गतिविधियों में इस्तेमाल शुद्ध नकदी ₹55 करोड़ से घटकर ₹19 करोड़ रही।
- मुक्त नकदी प्रवाह ऋणात्मक ₹71 करोड़ से सुधरकर ऋणात्मक ₹24 करोड़ रहा।
प्रबंधन के अनुसार, इन्वेंटरी में कमी और ग्राहकों से अधिक अग्रिम मिलने से कार्यशील पूंजी की जरूरत घटी। कंपनी के बैकऑर्डर मॉडल में ग्राहक पहले भुगतान करता है और उसके बाद डिजाइनर से उत्पाद खरीदा जाता है। उत्पाद के अनुसार डिलीवरी अवधि 7 से 90 दिन रहती है।
बड़े स्टोर और महंगे उत्पादों पर केंद्रित कारोबार
कंपनी ने FY26 में मुंबई के Fort और Linking Road, दिल्ली के South Ex तथा न्यूयॉर्क के Madison Avenue में चार बड़े अनुभव केंद्र खोले थे। प्रबंधन के अनुसार, FY27 इन निवेशों के संचालन का पहला पूरा वित्त वर्ष है।
कंपनी ने सक्रिय डिजाइनर ब्रांडों की संख्या FY24 के 1,910 से घटाकर FY26 में 1,109 की। इसी दौरान ₹1 लाख से अधिक कीमत वाले महिला परिधानों का GMV ₹187 करोड़ से बढ़कर ₹312 करोड़ हुआ। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि श्रेणियों के बीच सकल मार्जिन प्रतिशत में बहुत अंतर नहीं है; अधिक मूल्य वाले उत्पादों पर ध्यान देने से प्रति लेनदेन सकल लाभ और आपूर्ति प्रबंधन की दक्षता पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
