केंद्र सरकार ने CPSEs के लिए TReDS प्लेटफॉर्म पर MSME इनवॉइस निपटान अनिवार्य किया
सभी ऑपरेटिंग CPSEs को अब MSME से माल या सेवाओं की खरीद से जुड़े इनवॉइस का निपटान सिर्फ आरबीआई द्वारा अधिकृत किसी भी TReDS प्लेटफॉर्म के माध्यम से करना होगा। साथ ही, इन उद्यमों को MSME इनवॉइस की डिटेल्स—कितने इनवॉइस TReDS से रूट हुए और कितने सेटल हुए—आरबीआई द्वारा तय किए गए फॉर्म और तरीके से सार्वजनिक रूप से बतानी होंगी।

नई दिल्ली। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी कर केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (CPSEs) के लिए Trade Receivables Discounting System (TReDS) प्लेटफॉर्म के जरिए MSME इनवॉइस का निपटान अनिवार्य कर दिया है। यह अधिसूचना एस.ओ. 3507(ई) के रूप में 30 जून 2026 को भारत के राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित हुई और उसी दिन से लागू हो गई है।
क्या है नया नियम?
सभी ऑपरेटिंग CPSEs को अब MSME से माल या सेवाओं की खरीद से जुड़े इनवॉइस का निपटान सिर्फ आरबीआई द्वारा अधिकृत किसी भी TReDS प्लेटफॉर्म के माध्यम से करना होगा। साथ ही, इन उद्यमों को MSME इनवॉइस की डिटेल्स—कितने इनवॉइस TReDS से रूट हुए और कितने सेटल हुए—आरबीआई द्वारा तय किए गए फॉर्म और तरीके से सार्वजनिक रूप से बतानी होंगी।
यह आदेश सिर्फ CPSEs तक सीमित नहीं है। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित कोई भी अन्य प्राधिकरण, निकाय या इकाई भी इसी दायरे में आ सकती है।
TReDS क्यों जरूरी है MSME के लिए?
TReDS एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो MSME को बड़े खरीदारों (जैसे CPSEs) से मिलने वाले भुगतान को जल्दी और कम ब्याज पर डिस्काउंट कराने की सुविधा देता है। इससे छोटे उद्यमों को कैश फ्लो की समस्या काफी हद तक कम होती है। पहले कई CPSEs सीधे भुगतान करते थे या देरी करते थे, जिससे MSME प्रभावित होते थे। अब अनिवार्य रूप से TReDS के जरिए जाने से पारदर्शिता बढ़ेगी और भुगतान में देरी की शिकायतें घटेगी।
उद्योग पर असर
- MSME को फायदा: समय पर भुगतान मिलने की संभावना बढ़ेगी। बैंक और NBFC TReDS पर इनवॉइस को आसानी से फाइनेंस कर सकेंगे।
- CPSEs की जिम्मेदारी: अब उन्हें हर MSME इनवॉइस को TReDS पर अपलोड और सेटल करना अनिवार्य है। गैर-अनुपालन पर कार्रवाई का प्रावधान भी हो सकता है।
- पारदर्शिता: आरबीआई के फॉर्मेट में नियमित खुलासा करने से सरकारी खरीद में MSME की हिस्सेदारी साफ नजर आएगी।
यह कदम “आत्मनिर्भर भारत” और MSME सशक्तिकरण की दिशा में केंद्र सरकार की निरंतर कोशिश का हिस्सा है। पहले भी TReDS को बढ़ावा देने के कई उपाय किए गए थे, लेकिन अब इसे CPSEs के लिए बाध्यकारी बना दिया गया है।
सभी संबंधित CPSEs को तुरंत अपने खरीद और वित्त विभाग को निर्देश जारी करने चाहिए कि MSME इनवॉइस केवल RBI-अधिकृत TReDS प्लेटफॉर्म (जैसे RXIL, Invoicemart, M1xchange आदि) के जरिए ही निपटाए जाएं। साथ ही, नियमित रिपोर्टिंग का सिस्टम तैयार करना जरूरी है।
MSME क्षेत्र में काम करने वाले उद्यमियों को सलाह है कि वे अपने CPSEs खरीदारों से संपर्क कर TReDS पर ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया तेज करें। इससे न सिर्फ भुगतान जल्दी मिलेगा बल्कि बिजनेस में विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
निष्कर्ष: 30 जून 2026 से लागू यह अधिसूचना सरकारी खरीद में MSME को प्राथमिकता और सुरक्षा देने वाला मजबूत कदम है। TReDS प्लेटफॉर्म अब सिर्फ विकल्प नहीं, बल्कि CPSEs के लिए अनिवार्य माध्यम बन चुका है।
