सार्वजनिक क्षेत्र की नवरत्न कंपनी NBCC (India) Limited ने एक्सचेंज फाइलिंग में सूचित किया है कि कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने HSCC (India) Limited के एनबीसीसी के साथ प्रस्तावित विलय (Scheme of Amalgamation) के संबंध में फर्स्ट मोशन याचिका पर 9 अक्टूबर 2026 को आदेश पारित किया है। कंपनी ने बताया कि यह संयुक्त याचिका कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 230-232 के तहत दोनों कंपनियों के शेयरधारकों और लेनदारों के संदर्भ में दाखिल की गई थी। इस मामले में बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने HSCC की ओर से 14 जुलाई 2026 और NBCC की ओर से 10 अप्रैल 2026 को योजना को मंजूरी दी थी।

मंत्रालय ने 23 सितंबर 2026 को हुई सुनवाई के बाद दोनों कंपनियों द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और प्रार्थनाओं पर विचार करते हुए बैठकों के आयोजन से संबंधित राहत प्रदान की है:

  • इक्विटी शेयरधारक बैठकें: HSCC (ट्रांसफरर कंपनी) के सभी इक्विटी शेयरधारकों द्वारा शपथ पत्र के माध्यम से सहमति दिए जाने पर बैठक को माफ कर दिया गया है। वहीं, HSCC पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी होने और सौदे में कोई नए शेयर जारी न होने के कारण NBCC (India) Limited के इक्विटी शेयरधारकों की बैठक भी माफ कर दी गई है।
  • सुरक्षित लेनदार (Secured Creditors): दोनों कंपनियों द्वारा चार्टर्ड एकाउंटेंट के प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें 31 मार्च 2026 तक कोई सुरक्षित लेनदार न होने (nil secured creditors) की पुष्टि हुई, जिसके आधार पर इनकी बैठकें भी माफ की गईं।
  • असुरक्षित लेनदार: ट्रांसफरर और ट्रांसफरी कंपनियों के असुरक्षित लेनदारों की बैठकें भी माफ की गई हैं, क्योंकि इस योजना से उनके अधिकारों में कोई बदलाव नहीं हो रहा है।

एमसीए ने निर्देश दिया है कि 31 मार्च 2026 तक 1,00,00,000 रुपये (1 करोड़ रुपये) से अधिक राशि वाले प्रत्येक असुरक्षित लेनदार को योजना और दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत नोटिस भेजा जाएगा। नोटिस प्राप्ति के 30 दिनों के भीतर यदि कोई आपत्ति आती है, तो उसे मंत्रालय के समक्ष कंफर्मेशन पिटीशन के साथ दाखिल करना होगा। इसके अलावा, कंपनी अधिनियम के नियमों के अनुसार रीजनल डायरेक्टर (उत्तरी क्षेत्र), आरओसी दिल्ली, ऑफिशियल लिक्विडिएटर, आयकर विभाग, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय, सेबी, एनएसई, बीएसई तथा उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और केरल के रेरा प्राधिकरणों को भी नोटिस जारी किए जाएंगे। सभी औपचारिकताओं के अनुपालन के बाद दोनों कंपनियां पुष्टि याचिका (Confirmation Petition) दाखिल करेंगी।